
पटना : (Patna) बिहार विधानसभा के मानसून सत्र (monsoon session of the Bihar Legislative Assembly) के तीसरे दिन बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान राज्य की जर्जर ग्रामीण सड़कों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। खास बात यह रही कि यह मुद्दा विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) (BJP) के कल्याणपुर विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह (Kalyanpur MLA Sachindra Prasad Singh) ने उठाया। उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े पैकेजों में टेंडर दिए जाने के कारण कई सड़क परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रश्नकाल के दौरान सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्य में कई ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की निविदाएं बड़े-बड़े पैकेजों में जारी की गईं, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अनेक योजनाओं में केवल 10 से 15 प्रतिशत तक ही काम हो सका है। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि बड़े पैकेजों में निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है तो क्या दो या तीन सड़कों के छोटे-छोटे पैकेज बनाकर स्थानीय स्तर पर टेंडर जारी नहीं किए जा सकते, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और लोगों को राहत मिल सके।
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार (Rural Works Minister Sunil Kumar) ने कहा कि बड़े पैकेजों को लेकर जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार चिंता जताई जा रही थी। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय लिया गया है कि ग्रामीण कार्य विभाग अब 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले किसी भी नए पैकेज का टेंडर जारी नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य स्थानीय संवेदकों (ठेकेदारों) को अधिक अवसर उपलब्ध कराना और निर्माण कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करना है।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद विभाग ने 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत का कोई नया पैकेज जारी नहीं किया है। अब सड़क निर्माण कार्यों के लिए छोटे-छोटे पैकेजों में निविदाएं निकाली जा रही हैं। इससे स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में ग्रामीण कार्य विभाग (Rural Works Department) (RWD) बड़े पैकेजों के माध्यम से टेंडर जारी नहीं करेगा।
सुनील कुमार ने सदन को यह भी बताया कि ग्रामीण सड़क योजनाओं के लिए संचालित आरआरएसएम योजना के तहत विभाग को चरणबद्ध तरीके से धनराशि मिल रही है। जैसे-जैसे राशि उपलब्ध होती जाएगी, वैसे-वैसे लंबित परियोजनाओं का निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा।
उन्होंने विशेष रूप से आश्वस्त किया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (former Chief Minister Nitish Kumar), अन्य मंत्रियों अथवा विधायकों द्वारा जिन सड़कों और पुल-पुलियों का शिलान्यास किया गया था तथा बड़े पैकेजों के टेंडर रद्द होने के कारण जिनका निर्माण अधूरा रह गया, उन सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि धनराशि उपलब्ध होने के साथ ऐसी सभी परियोजनाओं का निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर पूरा किया जाएगा।
मंत्री ने कहा, “ऐसा कोई भी सड़क या पुल-पुलिया नहीं रहेगा, जिसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्री या विधायक ने किया हो और उसका निर्माण अधूरा रह जाए। सरकार सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
