
कल्याण : (Kalyan) करीब 19 वर्ष पुराने विनायक पवार (19-year-old death case of Vinayak Pawar) मौत मामले में कल्याण जिला एवं सत्र न्यायालय (Kalyan District and Sessions Court) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को गैर इरादतन हत्या (सदोष मनुष्यवध) और मारपीट का दोषी ठहराया है। मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश परवीन सैयद (Principal District and Sessions Judge Parveen Sayed) ने दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उन्हें दो माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।न्यायालय ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि मृतक विनायक पवार के पिता आकाराम पवार को मुआवजे के रूप में प्रदान की जाए। इसके अलावा मारपीट के अपराध में तीनों आरोपियों पर एक-एक हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है।
हत्या नहीं, गैर इरादतन हत्या का दोषी माना
दोषी ठहराए गए आरोपियों के नाम विनीत जयराम मेहेर, विकास बबन दलवी और हरीश जगन मेहेर (Vineet Jayram Meher, Vikas Baban Dalvi, and Harish Jagan Meher) हैं। अदालत ने उन्हें हत्या के आरोप से बरी करते हुए गैर इरादतन हत्या और मारपीट के अपराध में दोषी माना।अभियोजन के अनुसार, 15 अगस्त 2007 को विनायक पवार अपने दोस्तों के साथ टिटवाला स्थित गणपति मंदिर में दर्शन करने के बाद कालू नदी क्षेत्र में गया था। आरोप था कि वहां हुए विवाद के दौरान आरोपियों ने उसे पुल से नदी में धक्का दे दिया। उस समय नदी में बाढ़ का पानी होने के कारण विनायक की डूबने से मौत हो गई थी।
अदालत ने बताई फैसले की वजह
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपियों को यह अंदेशा था कि पुल से धक्का देने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं और मृत्यु भी हो सकती है, लेकिन हत्या करने का स्पष्ट इरादा साबित नहीं हुआ। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया।इस मामले में टिटवाला पुलिस स्टेशन (Titwala Police Station) में वर्ष 2007 में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद लंबे समय तक न्यायालय में सुनवाई चली। आखिरकार बुधवार को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। मामले में सरकारी पक्ष की ओर से अधिवक्ता सचिन कुलकर्णी ने पैरवी की।
