
सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू याचिका भी खारिज की
नई दिल्ली : (New Delhi) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति यानी SC (Scheduled Caste) का दर्जा खत्म होने के अपने फैसले के खिलाफ दाखिल समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन (Justice Prashant Kumar Mishra and Justice Manmohan) की पीठ ने कहा कि 24 मार्च के फैसले में रिकॉर्ड पर ऐसी कोई स्पष्ट गलती नहीं है, जिसके आधार पर उसकी समीक्षा की जाए। कोर्ट ने इस मामले में मौखिक सुनवाई की मांग वाली अर्जी को भी खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने समीक्षा याचिका पर विचार करते हुए कहा कि उसने याचिका और 24 मार्च को दिए गए मूल फैसले का अध्ययन किया है। अदालत को रिकॉर्ड में कोई स्पष्ट त्रुटि नजर नहीं आई। इसी आधार पर कोर्ट ने समीक्षा याचिका (review petition) को खारिज कर दिया और पहले दिए गए अपने फैसले को बरकरार रखा।
धर्म परिवर्तन के साथ SC दर्जा खत्म होने की बात
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को दिए अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि अनुसूचित जाति समुदाय का कोई व्यक्ति अगर हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो धर्म परिवर्तन के साथ ही उसका अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है। यानी व्यक्ति का जन्म भले ही अनुसूचित जाति समुदाय में हुआ हो, लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद वह SC दर्जे का दावा नहीं कर सकता।
ईसाई धर्म अपनाने के मामले में आया था फैसला
यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने अनुसूचित जाति समुदाय में जन्म लेने के बाद ईसाई धर्म अपना लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाते ही अपना SC दर्जा खो देता है।
अब रिव्यू याचिका भी खारिज, पुराना फैसला कायम
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा समीक्षा याचिका खारिज किए जाने के बाद 24 मार्च का फैसला प्रभावी बना हुआ है। अदालत ने साफ कर दिया है कि इस फैसले में रिकॉर्ड पर कोई स्पष्ट कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं मिली है। इस तरह धर्म परिवर्तन और अनुसूचित जाति के दर्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख एक बार फिर स्पष्ट हो गया है।
