
नई दिल्ली : (New Delhi) प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) (ईडी) ने वर्ष 2022 के कोयंबटूर बम विस्फोट मामले (2022 Coimbatore bomb blast case) में आतंकी फंडिंग की जांच के सिलसिले में गुरुवार को चेन्नई, कोयंबटूर, हैदराबाद और मुंबई में 16 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में सामने आया कि विस्फोट के आरोपितों ने फर्जी कोविड-19 वैक्सीन प्रमाणपत्र (COVID-19 vaccine certificate scam) घोटाले और कोवाई अरबी कॉलेज (Kovai Arabic College) के नाम पर चंदा एवं फर्जी निवेश के जरिए धन जुटाकर आतंकी गतिविधियों को वित्तपोषित किया।
ईडी ने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) (Money Laundering Act) के तहत यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) (एनआईए) की विभिन्न प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2022 में कोयंबटूर के संगमेश्वरर मंदिर (Sangameswarar Temple in Coimbatore in 2022) के निकट हुए आत्मघाती कार बम विस्फोट को जमेशा मुबीन और उसके साथियों ने अंजाम दिया था। यह हमला विस्फोटक पदार्थों से भरी संशोधित मारुति कार का इस्तेमाल कर प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) से प्रेरित आतंकी हमले के रूप में किया गया था।
ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के दो प्रमुख तरीके अपनाए। पहला, कोविड-19 महामारी के दौरान फर्जी वैक्सीन प्रमाणपत्र बनाने का गिरोह चलाया गया, जिसके माध्यम से बिना टीकाकरण कराए प्रमाणपत्र चाहने वाले लोगों से धन एकत्र किया गया।
दूसरा, कोवाई अरबी कॉलेज के नाम पर चंदा और फर्जी निवेश जुटाया गया। जांच के अनुसार, यह संस्थान युवाओं के कट्टरपंथीकरण में सक्रिय रूप से शामिल था।
ईडी ने बताया कि बम विस्फोट मामले के 12 आरोपितों, जिनमें आत्मघाती हमलावर जमेशा मुबीन भी शामिल है, ने कोवाई अरबी कॉलेज में ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से अध्ययन किया था। जांच के अनुसार, कॉलेज के संचालक जमील बाशा ने इन युवकों का मार्गदर्शन किया, जिसके बाद वे सलाफी-जिहादी विचारधारा से प्रभावित हुए और आईएसआईएस के समर्थन में आतंकी हमले की साजिश रची।
ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है।
