
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट (Judicial Magistrate First Class Vijayshree Rathore ने जेएनयू छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष और छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (Students’ Federation of India) (SFI) की संयुक्त सचिव आइशी घोष के खिलाफ 2021 में एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर के मामले में जारी गैर-जमानती वारंट को निरस्त कर दिया है। जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास विजयश्री राठौर (Judicial Magistrate First Class Vijayshree Rathore) ने आइशी घोष पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए चेतावनी दी कि आगे कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान वे उपस्थित रहेंगी।
कोर्ट ने 29 जुलाई को आइशी घोष के खिलाफ गैर जमानत वारंट पर आज तक के लिए रोक लगाई थी। कोर्ट ने आइशी घोष को निर्देश दिया कि वो 30 जुलाई को व्यक्तिगत रुप से पेश हों। आइशी घोष की ओर से पेश वकील केएन जयशंकर, सुभाषचंद्रन केआर और जैमोन एंड्रयूज ने कहा कि गैर जमानती वारंट 11 अप्रैल को जारी किया गया था। ये गैर जमानती वारंट तामील नहीं किया गया था और कहा गया कि वो दिए गए पते पर नहीं मिलीं। हालांकि उन्हें फोन से इसकी सूचना दे दी गई। उसके बाद कोर्ट ने 30 जुलाई को पेश होने के लिए गैरजमानती वारंट जारी किया।
सीपीएम के दिल्ली स्थित दफ्तर पर 28 जुलाई को आइशी घोष को इस मामले में गिऱफ्तार करने के लिए पुलिस गई थी। इसके बाद सीपीएम के नेताओं और पुलिस के बीच बहस हो गई थी। सीपीएम नेताओं ने आरोप लगाया था कि आइशी घोष को पुलिस इसलिए गिरफ्तार करना चाहती है क्योंकि उन्होंने हालिया जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।
ये मामला 2021 में दिल्ली के बंग भवन पर प्रदर्शन के दौरान का है जिसमें आइशी घोष के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 एवं 447 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। आइशी घोष ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2021 के चुनाव में सीपीएम उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ा था लेकिन वे ये चुनाव हार गई थीं। आइशी घोष ने काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में पहले दिन से ही हिस्सा लिया था।
