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Mumbai : रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

Mumbai: Indefinite Strike by Resident Doctors

मुंबई: (Mumbai) महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। राज्यभर के करीब 12 से 15 हजार रेजिडेंट डॉक्टर (12,000 to 15,000 resident doctors) 5 अगस्त से आंदोलन पर चले गए हैं। इसका असर मुंबई के केईएम, सायन, नायर और जे.जे. अस्पताल (Mumbai’s KEM, Sion, Nair, and JJ hospitals) सहित राज्य के 32 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दिखाई दे रहा है, जहां ओपीडी सेवाएं और नियमित सर्जरी प्रभावित हुई हैं।

सरकार को 24 घंटे की चेतावनी
रेजिडेंट डॉक्टरों ने पहले 24 घंटे तक मानवीय आधार पर आपातकालीन और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, सेंट्रल मार्ड (Central MARD) ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 6 अगस्त से आपातकालीन सेवाएं भी बंद की जा सकती हैं। आंदोलन को राज्य के बड़ी संख्या में एलोपैथिक चिकित्सकों का समर्थन मिलने की भी बात कही जा रही है।

मुंबई के चार बड़े सरकारी अस्पतालों में रूटीन ओपडी सेवाएं बंद
बीएमसी महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (बीएमसी मार्ड) ने बुधवार से मुंबई के चार बड़े सरकारी अस्पतालों में रूटीन ओपडी सेवाएं बंद कर दी हैं। प्रभावित अस्पतालों में केईएम अस्पताल, लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल मेडिकल कॉलेज और जनरल अस्पताल सायन, बीवाईएल नायर अस्पताल और डॉ. आरएन कूपर (KEM Hospital, Lokmanya Tilak Municipal Medical College and General Hospital (Sion), BYL Nair Hospital, and Dr. RN Cooper Hospital) अस्पताल शामिल हैं। बीएमसी मार्ड का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार सीसीएमपी कोर्स किए हुए बीएचएमएस डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन देने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। डॉक्टरों की संस्था ने पहले भी इसका कई बार विरोध किया था। बीएमसी मार्ड ने साफ किया है कि इमरजेंसी, कैजुअल्टी, आईसीयू, लेबर रूम, आईपीडी और बाकी जरूरी सेवाएं पहले की तरह चलती रहेंगी। सिर्फ सामान्य ओपीडी बंद की गई है ताकि मरीजों को ज्यादा परेशानी न हो।

क्या है पूरा मामला?
हड़ताल का मुख्य कारण महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (Maharashtra Medical Council) (एमएमसी) का वह निर्णय है, जिसके तहत सीसीएमपी (सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी) पूरा करने वाले बीएचएमएस चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा की दवाएं लिखने की अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। मार्ड और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का कहना है कि यह व्यवस्था मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता के लिए गंभीर चुनौती है। सतारा जिले के फलटण में एक महिला डॉक्टर की आत्महत्या के बाद आंदोलन और तेज हो गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि मृतका ने अपने सुसाइड नोट में मानसिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। चिकित्सकों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) या सीआईडी (Special Investigation Team (SIT) or the CID) जांच की मांग की है।डॉक्टरों का कहना है कि यह आंदोलन केवल मिक्सोपैथी के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि रेजिडेंट डॉक्टरों पर बढ़ते कार्यभार और मानसिक दबाव का भी परिणाम है। उनका दावा है कि लंबे समय तक काम करने और संसाधनों की कमी के कारण बड़ी संख्या में डॉक्टर मानसिक तनाव और कार्यजनित थकान का सामना कर रहे हैं।

हाई कोर्ट में लंबित है मामला
बीएचएमएस चिकित्सकों को सीमित आधुनिक चिकित्सा अधिकार देने का मामला फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में विचाराधीन है। जहां एक पक्ष इसे ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने का उपाय बता रहा है, वहीं एलोपैथी चिकित्सक इसे चिकित्सा व्यवस्था के लिए जोखिमपूर्ण मान रहे हैं। इस बीच हड़ताल के कारण मरीजों को इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।