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Mumbai : बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेप मामले में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया, ट्रायल कोर्ट का बरी करने का फैसला पलटा

Mumbai: Bombay High Court convicts Tarun Tejpal in rape case; overturns trial court's acquittal

मुंबई : (Mumbai) बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने गुरुवार को तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल (Tehelka editor Tarun Tejpal) को 2013 के चर्चित यौन उत्पीडऩ मामले में दोषी करार दिया। अदालत ने मई 2021 में गोवा की सत्र अदालत द्वारा सुनाए गए बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया।

लाइव लॉ के अनुसार बंबई उच्च न्यायालय की गोवा बेंच की जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने आज तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (भादंस) की धारा 376(2)(फ), 35(अ) और 354(ब) के तहत दोषी ठहराया। धारा 376(2)(फ) के तहत दोषसिद्धि पर न्यूनतम 10 वर्ष के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अभी केवल दोषसिद्धि का फैसला सुनाया है। सजा की अवधि पर अलग से आदेश जारी किया जाएगा।

बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि वह इस निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि उन्हें उच्च न्यायालय का फैसला गलत प्रतीत होता है और वह इसके खिलाफ अपील करेंगे। मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार (Goa government) ने इस फैसले को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी। लंबी सुनवाई के बाद बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया।

उल्लेखनीय है कि यह मामला 7 और 8 नवंबर 2013 का है। आरोप है कि गोवा में आयोजित थिंक फेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहकर्मी के साथ दो बार यौन उत्पीडऩ किया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि तेजपाल ने उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ यौन उत्पीडन किया। इस घटना के बाद 18 और 19 नवंबर 2013 को पीडि़ता ने संस्थान के भीतर शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद तरुण तेजपाल ने ईमेल के माध्यम से बिना शर्त माफी मांगी। 30 नवंबर 2013 को अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने लगभग सात महीने जेल में बिताए और जुलाई 2014 में उच्चतम न्यायालय से उन्हें जमानत मिली। सितंबर 2017 में ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए थे, जबकि तेजपाल ने स्वयं को निर्दोष बताया था। इसके बाद 21 मई 2021 को गोवा के मापुसा जिला एवं सत्र न्यायालय ने सबूतों की कमी और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। अब बंबई उच्च न्यायालय की गोवा बेंच ने उस फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया है। सजा पर अंतिम आदेश अभी आना बाकी है।