
लखनऊ : (Lucknow) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने शुक्रवार को पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) पर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 2017 से पहले की सरकारें भाई-भतीजावाद में उलझी थीं और उनके पास जनता के लिए समय नहीं था।
योगी ने कहा कि हथकरघा उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा कुटीर उद्योग (handloom is Uttar Pradesh’s largest cottage industry) है। बुनकरों और एमएसएमई उत्पादों के पंजीकरण के साथ पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था 2017 से पहले भी हो सकती थी, लेकिन तत्कालीन सरकारों के पास इसकी फुर्सत नहीं थी।
पेयजल को तरसते थे स्कूली बच्चे
मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि गरीबों के बच्चों के स्कूलों में शिक्षक, भवन, शौचालय और पेयजल तक की व्यवस्था नहीं थी। आज विद्यार्थियों को ड्रेस, जूते-मोजे, बैग, कॉपी और किताबें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
हथकरघा क्षेत्र में 70% महिलाएं
उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में करीब 70 फीसदी महिलाएं काम कर रही हैं। सरकार बुनकरों और कारीगरों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उत्पादों को आधुनिक तकनीक और डिजाइन से जोड़कर बाजार की मांग के अनुरूप तैयार कराने पर जोर दिया जाएगा।
बुनकरों को संत कबीर पुरस्कार
कार्यक्रम में योगी ने उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार (Sant Kabir State-Level Handloom Award) से सम्मानित किया और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को आर्थिक सहायता के चेक बांटे। उन्होंने लोगों से कारीगरों के बनाए उत्पादों को उपहार के रूप में इस्तेमाल करने की अपील की।
यूपी में तीन लाख से अधिक हथकरघा
एमएसएमई मंत्री राकेश सचान (MSME Minister Rakesh Sachan) ने बताया कि प्रदेश में तीन लाख से अधिक हथकरघे संचालित हैं। मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना तथा झलकारी बाई कोरी योजना के तहत हजारों बुनकरों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।
संत कबीर टेक्सटाइल पार्क प्रस्तावित
सचान ने कहा कि पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क (PM MITRA Mega Textile Park) और प्रस्तावित संत कबीर टेक्सटाइल पार्क (Sant Kabir Textile Park) से वस्त्र उद्योग को नई गति और रोजगार के अवसर मिलेंगे। हथकरघा उत्पादों के विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू भी किए गए।
