
मुंबई : (Mumbai) ठाणे खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट (international Ramsar site) का दर्जा मिला; लेकिन, इस खाड़ी की गोद में रहने वाले कोपरीकरों को अपनी ही खाड़ी की सुंदरता देखने देने के लिए रुकावटों की दीवार खड़ी कर दी गई है। एक तरफ बायोडायवर्सिटी बचाने की बात और दूसरी तरफ कंक्रीट का विकास, ऐसी ही अजीब स्थिति ठाणे ईस्ट के चेंदानी कोलीवाड़ा पोर्ट (Chendani Koliwada Port) (गणपति विसर्जन घाट) पर देखने को मिल रही है।
अगस्त 2022 में, ठाणे खाड़ी को रामसर साइट का दर्जा मिला। इससे सभी को खाड़ी और मैंग्रोव जंगल के लगभग 6,500 हेक्टेयर इलाके की अहमियत समझ में आई। लेकिन, स्मार्ट सिटी और वॉटर फ्रंट डेवलपमेंट के नाम पर चेंदनी पोर्ट इलाके की कुदरती छटा कम कर दी गई है और बड़े पैमाने पर कंक्रीटिंग और कुदरती छटा कम होने की वजह से कोपरीकर की ‘मिनी चौपाटी’ (“Mini Chowpatty”) अपनी कुदरती खूबसूरती खो रही है।इस संबंध में ठाणे स्मार्ट सिटी के कार्यकारी अभियंता मोहन कलाल से संपर्क करने पर उन्होंने अधिकृत रूप से कुछ भी कहने से इनकार किया है।
बताया जाता है कि ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो, सीगल, जंगली बत्तख, सैंडपाइपर, पेंटेड स्टॉर्क, स्पूनबिल (flamingos, seagulls, wild ducks, sandpipers, painted storks, and spoonbills) जैसे पक्षियों के लिए एक ज़रूरी जगह है। यहां 200 से ज़्यादा पक्षियों की प्रजातियां देखी गई हैं। हालांकि, असली फ्लेमिंगो और पक्षियों को देखने के मौके कम होते जा रहे हैं, वहीं नगर पालिका ने इलाके में सिंबॉलिक फ्लेमिंगो खड़े कर दिए हैं। इसलिए, लोगों का सवाल है कि असली फ्लेमिंगो को न देखकर बनावटी फ्लेमिंगो दिखाना कैसा डेवलपमेंट है?
क्रीक में निर्मल्या (Nirmalya) डालकर प्रदूषण रोकने और सुरक्षा कारणों से लोहे का गेट लगाया गया था। पिछले दो सालों में, गेट से क्रीक में घुसने की कोशिश करने वाले दो लोग डूबकर मर गए। उसके बाद यहां सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात किए गए हैं। तो, अब जब सिक्योरिटी गार्ड हैं, तो लोहे के गेट को बनाए रखने का क्या मकसद है? यह कोपरीकर्स का सीधा सवाल है।
रामसर स्टेटस (Ramsar status) सिर्फ पट्टिका और सिंबॉलिक फ्लेमिंगो के बारे में नहीं है, बल्कि खाड़ी, मैंग्रोव जंगल, पक्षियों और नागरिकों के प्रकृति के साथ रिश्ते को बचाने के बारे में भी है। इसलिए, यह मांग है कि नागरिक चेंदानी कोलीवाड़ा पोर्ट पर सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से खाड़ी का अनुभव कर सकें।
ठाणे ईस्ट कोपरी चांदनी कोलीवाडा के सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल कोली का कहना है कि -अब समय आ गया है कि विकास और प्रकृति के बीच बैलेंस बनाया जाए, न कि ठाणे को, जिसे प्रकृति का आशीर्वाद मिला है, कंक्रीट के एनाकोंडा निगल जाएं। बस यही उम्मीद है कि कोपरीकर्स की मिनी चौपाटी फिर से प्रकृति की गोद में दिखे, न कि कंक्रीट के फ्रेम में।
