
मुंबई : (Mumbai) साइबर ठगों ने मुंबई पुलिस और सरकारी अधिकारी बनकर भगवाननगर निवासी 70 वर्षीय सेवानिवृत्त लिपिक विजय सखाराम पवार (Vijay Sakharam Pawar) को डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर छह दिनों में 87 लाख 80 हजार 600 रुपये ठग लिए। आरोपियों ने पवार को बताया कि उनके नाम पर एक मोबाइल नंबर मुंबई से सक्रिय किया गया है और उससे 20 शिकायतें जुड़ी हैं। खुद को सरकारी अधिकारी अमित कुमार चौधरी (government official Amit Kumar Chaudhary and Sub-Inspector Sandeeprao)और मुंबई के कुलाबा पुलिस थाने का उपनिरीक्षक संदीपराव बताकर आरोपियों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने तथा गिरफ्तारी वारंट जारी होने की धमकी दी। लगातार फोन और वाट्सऐप कॉल कर दबाव बनाए जाने के कारण पवार डर गए और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे।
फर्जी आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज भेजकर बनाया भरोसा
ठगों ने पवार को वाट्सऐप के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) का कथित प्रमाणपत्र और सुप्रीम कोर्ट से संबंधित फर्जी दस्तावेज भेजे। इसके अलावा रकम भेजे जाने और आरटीजीएस लेन-देन की जाली रसीदें भी भेजकर उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि पूरी प्रक्रिया सरकारी जांच का हिस्सा है। गिरफ्तारी के डर से पवार ने आरोपियों के कहने पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। 4 से 10 अगस्त के बीच 87.80 लाख रुपये अलग-अलग खातों में भेजे जाने के बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने अजनी पुलिस थाने (Ajni Police Station) में शिकायत दर्ज कराई।
मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
अजनी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और रकम के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक नेहाल गुंदे्र कर रहे हैं, जबकि पुलिस निरीक्षक सुरेश डांबरे के मार्गदर्शन में आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से ऐसे फर्जी फोन, वीडियो कॉल और सरकारी दस्तावेजों के नाम पर पैसे मांगने वाले आरोपियों से सतर्क रहने की अपील की है।
