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Mumbai : महाराष्ट्र में 36,211 कंपनियां बंद

Mumbai: 36,211 companies closed in Maharashtra

सांसद शरद पवार को लिखे पत्र में दिए आंकड़े
आरोप पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सफाई
76% कंपनियां ‘डिफंक्ट’ थीं जो कभी शुरू ही नहीं हुई थीं
मुंबई : (Mumbai)
महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान 36,211 निजी कंपनियों के बंद होने या रजिस्टर से हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Sharadchandra Pawar) के प्रमुख शरद पवार ने इस मुद्दे और चाकण औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने कहा कि इन आंकड़ों को सही संदर्भ में समझना जरूरी है।

चाकण से कंपनियों के पलायन पर पवार की चिंता
शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा कि चाकण औद्योगिक क्षेत्र की करीब 20 कंपनियों ने ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, पानी-बिजली की समस्या और खराब सड़कों के कारण स्थानांतरण का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इन कंपनियों में 2,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। पवार ने कहा कि उद्योगों को महाराष्ट्र से बाहर जाने से रोकना आवश्यक है, ताकि रोजगार के अवसर सुरक्षित रहें और राज्य की औद्योगिक ताकत बनी रहे। उन्होंने सरकार से चाकण, तलेगांव और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का युद्धस्तर पर विकास करने की मांग की।

बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग
पवार ने सड़कों की मरम्मत, गड्ढों की समस्या के समाधान, ट्रैफिक जाम कम करने तथा पानी और बिजली की उपलब्धता मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने एमआईडीसी और अन्य औद्योगिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के साथ उद्योगपतियों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू करने की मांग भी की।

रोजगार पर भी उठाए सवाल
शरद पवार ने कहा कि जिन कंपनियों का संचालन बंद हुआ, उनसे जुड़े कितने लोगों की नौकरियां गईं और प्रभावित कर्मचारियों को उचित मुआवजा मिला या नहीं, इसकी जानकारी सरकार के पास नहीं है। उन्होंने इसे गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया।

पूरी तस्वीर नहीं बताता 36 हजार का आंकड़ा: फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने पवार के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि संसद में दिए गए आंकड़ों को केवल “कंपनियां बंद हो गईं” के रूप में देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बंद या रजिस्टर से हटाई गई कंपनियों में करीब 76 प्रतिशत कंपनियां ‘डिफंक्ट’ थीं, यानी वे कभी सक्रिय रूप से शुरू ही नहीं हुई थीं।

उन्होंने बताया कि लगभग 12 प्रतिशत कंपनियों का अन्य कंपनियों में विलय हो गया था। इसके अलावा, वर्ष 2019-20 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने विशेष अभियान चलाकर देशभर में लगभग छह लाख निष्क्रिय कंपनियों को रजिस्टर से हटाया था।

महाराष्ट्र अब भी उद्योगों का प्रमुख केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 31 लाख से अधिक कंपनियां पंजीकृत हैं, जिनमें से 21 लाख से अधिक सक्रिय हैं। वर्ष 2015-16 में सक्रिय कंपनियों की संख्या 6.78 लाख थी, जो अब बढ़कर 21.17 लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक महाराष्ट्र में 3.96 लाख से अधिक सक्रिय कंपनियां हैं और राज्य इस मामले में देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश का स्थान है। फडणवीस ने कहा कि वर्ष 2025-26 में महाराष्ट्र में 41,525 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि महाराष्ट्र अभी भी देश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र बना हुआ है।

कांग्रेस ने रोजगार के आंकड़े मांगे
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले (Senior Congress leader Nana Patole) ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि हजारों कंपनियां बंद हुई हैं तो इससे कितने लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पटोले ने मांग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि प्रभावित कर्मचारियों के पुनर्वास, मुआवजे और रोजगार सहायता के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल कंपनियों के आंकड़े बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार पर पड़े प्रभाव की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।