
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) के बयान मामले पर लखनऊ के ट्रायल कोर्ट में चल रहे आपराधिक मानहानि मामले को निरस्त कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता (Justice Dipankar Datta) की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
उच्चतम न्यायालय ने लखनऊ के कोर्ट (Lucknow court) की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन के आदेश को भी निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामा में इस बात का कहीं जिक्र नहीं है कि राहुल गांधी के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति मिली हो। ऐसे में ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त किया जाता है।
इसके पहले 25 अप्रैल 2025 को उच्चतम न्यायालय ने सावरकर को लेकर राहुल गांधी के बयान पर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि हम स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ़ किसी को अनाप-शनाप बोलने की इजाजत नहीं दे सकते हैं। उन्होंने हमें आजादी दिलाई और हम उनके साथ क्या व्यवहार कर रहे हैं। कोर्ट ने राहुल गांधी को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर आगे से ऐसा कोई बयान देते हैं तो हम स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे।
हालांकि 25 अप्रैल 2025 को उच्चतम न्यायालय ने राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ के ट्रायल कोर्ट में चल रहे आपराधिक मानहानि मामले पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए राहुल गांधी को निचली अदालत द्वारा जारी समन पर रोक लगाई थी।
राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर के खिलाफ बयानबाजी करते हुए उन्हें अंग्रेजों का नौकर बताया और कहा कि सावरकर अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता (Justice Dipankar Datta) ने कहा था कि क्या हम महात्मा गांधी को अंग्रेजों का नौकर इसलिए कह सकते हैं कि उन्होंने वायसराय को लिखे अपने पत्र में लिखा था कि -योर फेथफुली सर्वेंट। कोर्ट ने राहुल गांधी की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) से कहा था कि आपके मुवक्किल की दादी, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री थीं, ने सावरकर की प्रशंसा में पत्र लिखे थे। आप स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ऐसा सलूक नहीं कर सकते हैं। आप राहुल गांधी से कहिए कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में गैर जिम्मेदाराना बयान न दें।
