
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) की जस्टिस प्रतिभा सिंह (Justice Pratibha Singh) की अध्यक्षता वाली बेंच ने लाल किला ब्लास्ट मामले के आरोपित जसीर बिलाल वानी (Jaseer Bilal Wani) उर्फ दानिश की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) (National Investigation Agency) के मुताबिक दानिश ने ड्रोन में तकनीकी बदलाव किए और कार बम विस्फोट से पहले रॉकेट तैयार करने की कोशिश की। दानिश ने उमर उन नबी के साथ मिलकर पूरी साजिश को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। एनआईए के मुताबिक राजनीति विज्ञान में स्नातक दानिश को आत्मघाती हमलावर बनाने के लिए उमर ने ब्रेनवाश किया। वह अक्टूबर, 2024 में कुलगाम की एक मस्जिद में डॉक्टर मॉड्यूल से मिलने को तैयार हुआ, जहां से उसे हरियाणा के फरीदाबाद में अल फलाह विश्वविद्यालय (Al-Falah University in Faridabad, Haryana) में रहने के लिए ले जाया गया।
एनआईए के मुताबिक दानिश को पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir Police) ने हिरासत में लिया था और पूछताछ में उसने खुलासा किया था कि मॉड्यूल के अन्य लोग उसे प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद के लिए ओवर-ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) (Over-Ground Worker) बनाना चाहते थे, जबकि उमर कई महीनों से उसका ब्रेनवॉश कर आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार कर रहा था। उमर की यह कोशिश अप्रैल, 2025 में उस समय नाकाम हो गई, जब दानिश ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस्लाम में आत्महत्या को गलत मानने का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया था।
लाल किला के पास 10 नवंबर, 2025 को आई-10 कार में ब्लास्ट हुआ था। ये कार आमिर रशीद अली (Aamir Rashid Ali) के नाम पर थी। इस ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत हुई थी और 32 लोग घायल हो गए थे।
