
कोलकाता : (Kolkata) कलकत्ता हाई कोर्ट की न्यायाधीश शंपा घोष (Calcutta High Court Judge Shampa Ghosh) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस (former West Bengal minister Sujit Bose) की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। बोस ने नगरपालिका भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) (ईडी) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए अदालत में याचिका दायर की थी।
न्यायमूर्ति शंपा घोष ने बताया कि 18 अगस्त को बोस की ओर से पेश एक वकील उनकी अनुपस्थिति में उनके कक्ष में आया था। आरोप है कि वकील ने न्यायाधीश के निजी सचिव से मामले से संबंधित एक फाइल निकालने को कहा। न्यायाधीश ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसकी जानकारी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को दी।
इसके बाद न्यायमूर्ति घोष ने मामले से खुद को अलग करने का फैसला किया। अब यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा, जो तय करेंगे कि आगे इसकी सुनवाई किस न्यायाधीश की अदालत में होगी। हालांकि, सुजीत बोस की कानूनी टीम ने दावा किया है कि उनकी ओर से किसी भी वकील ने न्यायाधीश के कक्ष का दौरा नहीं किया था।
बोस को 2026 के विधानसभा चुनाव परिणाम 2026 (assembly election results) घोषित होने के कुछ समय बाद नगरपालिका भर्ती घोटाले के सिलसिले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि बोस ने पैसे के बदले विभिन्न नगरपालिकाओं में 300 से अधिक उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इन आरोपों से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
बोस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी (Senior Advocate Abhishek Manu Singhvi) ने अदालत में दलील दी थी कि मामले में दाखिल पहली दो आरोपपत्रों में उनके मुवक्किल का नाम नहीं था। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने 2023 में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू की थी और इसके बाद बोस की अचानक गिरफ्तारी को पूरी तरह गैरकानूनी बताया।
जुलाई 2025 में ईडी ने भर्ती घोटाले के सिलसिले में बोस के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें उनके बेटे समुद्र बोस, उनकी दो कंपनियों और कंपनी के पूर्व निदेशक ज्योतिष्मान चटर्जी (Samudra Bose, his two companies, and the company’s former director Jyotishman Chatterjee) के नाम भी शामिल किए गए थे।
