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Kathmandu : नेपाल प्रतिनिधिसभा में संविधान संशोधन के लिए सिर्फ दो तिहाई बहुमत पर्याप्त नहीं : लामिछाने

Kathmandu: A two-thirds majority in the Nepal House of Representatives is not enough to amend the Constitution: Lamichhane

काठमांडू : (Kathmandu) नेपाल के राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party) (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने (Ravi Lamichhane) ने कहा है कि प्रतिनिधिसभा में दो-तिहाई बहुमत ही संविधान संशोधन के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है।

प्रतिनिधि सभा की राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति की बैठक में गुरुवार को उन्होंने आरएसपी सांसदों से संविधान संशोधन की बात इस तरह नहीं उठाने का आग्रह किया। लामिछाने ने कहा कि कुछ साथियों ने कहा कि हम संविधान संशोधन करेंगे, लेकिन संविधान संशोधन के लिए केवल प्रतिनिधिसभा का दो-तिहाई बहुमत पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें करते समय विषय की संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है। हालांकि, सरकार को सहयोग करने की बात का उन्होंने स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि भावना के आधार पर यह ठीक है, लेकिन तथ्य, कानून और संविधान—इन सभी बातों को ध्यान में रखना होगा। लामिछाने ने जोर दिया कि फिलहाल संविधान में जो व्यवस्था है, उसका पालन करते हुए अधिकतम रूप से जनता के जनादेश को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में की गई व्यवस्था के अनुसार ही संवैधानिक निकायों के पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई है और संविधान ने उन्हें जो-जो जिम्मेदारियां दी हैं, वे उसी के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुंचे, इसे लेकर वह सतर्क हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इससे संस्थाओं का क्षरण हो सकता है।

लामिछाने ने कहा कि यदि संस्थाओं का लगातार क्षरण होता गया तो अंततः इससे लोकतंत्र बहुत कमजोर हो सकता है, यह मेरा अपना आकलन है।उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत गुस्से के कारण लोकतंत्र के आधार स्तंभ मानी जाने वाली लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर या गिराने का प्रयास किया गया तो वे धीरे-धीरे कमजोर होती जाएंगी और एक समय के बाद उनकी विश्वसनीयता शून्य तक पहुंच सकती है। उन्होंने आगे कहा, “अंततः यह लोकतंत्र और व्यवस्था को धराशायी करने की स्थिति तक पहुंचा देगा।

आरएसपी अध्यक्ष ने कहा कि वह ऐसे समाज की कल्पना नहीं करते, जहां कोई किसी की बात न माने और किसी को किसी पर विश्वास न हो। उन्होंने कहा कि हमें अपने संशोधन के जरिए संभव हो तो एक-दो ईंटें और जोड़नी चाहिए और यदि ऐसा नहीं कर सकते तो कम से कम संस्थाओं को क्षय होने से रोककर समस्या के समाधान का रास्ता तलाशना चाहिए।