
नई दिल्ली :(New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री (Prime Minister Narendra Modi’s degree) का खुलासा करने वाली याचिका पर सुनवाई टाल दी है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय (Chief Justice DK Upadhyaya) की अध्यक्षता वाली बेंच ने 29 सितंबर को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया।
आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई दोपहर बाद करने की मांग की गई। तब कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) से पूछा कि क्या आप दोपहर बाद उपलब्ध हैं। तब मेहता ने कहा कि इस पर कल सुनवाई कर ली जाए। उसके बाद कोर्ट ने 29 सितंबर की तिथि नियत करने का आदेश दिया। इस पर मेहता ने कहा कि 29 सितंबर के पहले की तिथि नियत की जाए। तब कोर्ट ने कहा कि हमने अपना कैलेंडर चेक कर लिया है।
इसके पहले 10 फरवरी को दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा था कि प्रधानमंत्री की डिग्री का खुलासा करने वाली याचिका केवल सनसनी पैदा करने के लिए दायर की गई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। सुनवाई के दौरान मेहता ने आपत्ति दाखिल करने के लिए और समय देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि याचिका दाखिल करने में देरी और याचिका के गुणों पर जवाब दाखिल करेंगे।
12 नवंबर 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने कहा था कि सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं तय समय-सीमा के बाद दाखिल की गई हैं। कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) को निर्देश दिया था कि वो देर से याचिकाएं दाखिल करने पर अपनी आपत्ति दाखिल करें। याचिका दायर करने वालों में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, आरटीआई कार्यकर्ता नीरज शर्मा और वकील मोहम्मद इरशाद (Aam Aadmi Party MP Sanjay Singh, RTI activist Neeraj Sharma, and lawyer Mohammad Irshad) शामिल हैं। इन याचिकाकर्ताओं ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी है।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने इसे निजी जानकारी बताते हुए साझा करने से इनकार कर दिया था। विश्वविद्यालय के मुताबिक इससे कोई सार्वजनिक हित नहीं पूरा होता है। उसके बाद नीरज शर्मा ने केंद्रीय सूचना आयोग का रुख किया जिसने दिल्ली विश्वविद्यालय की सूचना अधिकारी मीनाक्षी सहाय (Delhi University’s Information Officer, Meenakshi Sahay) पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आयोग ने डिग्री से संबंधित जानकारी देने का भी आदेश दिया। केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission) के इसी फैसले के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।
