
ओबीसी प्रमाणपत्र को समिति ने ठहराया अवैध
मुंबई : (Mumbai) माहिम के प्रभाग क्रमांक 191 से निर्वाचित उबाठा की नगरसेविका और पूर्व महापौर विशाखा राऊत (mayor Vishakha Raut) का महापालिका सदस्यत्व अब खतरे में पड़ गया है। राऊत ने ओबीसी वर्ग से चुनाव लड़ा था और इसके लिए जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। पालघर जाति प्रमाणपत्र वैधता समिति ने इस प्रमाणपत्र को अवैध घोषित कर दिया है। प्रभाग क्रमांक 191 से चुनाव लड़ने वाली विशाखा राऊत के बाद दूसरे स्थान पर शिवसेना की उम्मीदवार प्रिया सदा सरवणकर (Priya Sada Sarvankar) रही थीं। ऐसे में राऊत का सदस्यत्व रद्द होने की स्थिति में प्रिया सरवणकर के नाम पर भी चर्चा हो सकती है। समिति के आदेश के अनुसार, विशाखा राऊत द्वारा चुनाव के दौरान प्रस्तुत जाति प्रमाणपत्र की जांच उपविभागीय अधिकारी तथा उपविभागीय दंडाधिकारी, पालघर के समक्ष की गई। जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारी को यह प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं था। इसके चलते प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया।
कुणबी जाति का रक्त संबंध साबित नहीं कर सकीं
राऊत ने कुणबी जाति वैधता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन के साथ शपथपत्र और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। हालांकि, समिति के अनुसार, इन दस्तावेजों के आधार पर वह कुणबी जाति के वैधता प्रमाणपत्र धारकों के साथ अपना रक्त संबंध साबित नहीं कर सकीं।
15 दिन में प्रमाणपत्र जमा करने का निर्देश
समिति ने आदेश मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर पालघर के उपविभागीय अधिकारी तथा उपविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र समिति के कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही आदेश के खिलाफ विभागीय आयुक्त, कोंकण विभाग (Konkan Division) के समक्ष निर्धारित अवधि में अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।
