बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

खोजें (Search News)

ताजा खबर
13:19चेतना सिंह ने लॉन्च किया नया डिजिटल मनोरंजन मंच•06:55मध्य रेल ने माल ढुलाई से 3,400 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया•07:28Nanded : किसानों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा: सुनेत्रा पवार•12:03New Delhi : दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से कहा- बैंक कर्मचारियों को विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराएं•07:17Islamabad : पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर गोलीबारी•11:51Mumbai : एनएसई के शेयर की लिस्टिंग एक ऐतिहासिक मील का पत्थर: आशीष चौहान•10:33New Delhi : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मार्केट कैप के लिहाज से शीर्ष 10 कंपनियों में हुआ शामिल•10:20Mumbai : साहिल वाकोडे आत्महत्या मामले में निष्पक्ष जांच हो : उदय भानू चिंब•13:19चेतना सिंह ने लॉन्च किया नया डिजिटल मनोरंजन मंच•06:55मध्य रेल ने माल ढुलाई से 3,400 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया•07:28Nanded : किसानों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा: सुनेत्रा पवार•12:03New Delhi : दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से कहा- बैंक कर्मचारियों को विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराएं•07:17Islamabad : पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर गोलीबारी•11:51Mumbai : एनएसई के शेयर की लिस्टिंग एक ऐतिहासिक मील का पत्थर: आशीष चौहान•10:33New Delhi : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मार्केट कैप के लिहाज से शीर्ष 10 कंपनियों में हुआ शामिल•10:20Mumbai : साहिल वाकोडे आत्महत्या मामले में निष्पक्ष जांच हो : उदय भानू चिंब•

Mumbai : खतरे में विशाखा राऊत का नगरसेवक पद

Mumbai: Vishakha Raut's corporator position in jeopardy

ओबीसी प्रमाणपत्र को समिति ने ठहराया अवैध
मुंबई : (Mumbai)
माहिम के प्रभाग क्रमांक 191 से निर्वाचित उबाठा की नगरसेविका और पूर्व महापौर विशाखा राऊत (mayor Vishakha Raut) का महापालिका सदस्यत्व अब खतरे में पड़ गया है। राऊत ने ओबीसी वर्ग से चुनाव लड़ा था और इसके लिए जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। पालघर जाति प्रमाणपत्र वैधता समिति ने इस प्रमाणपत्र को अवैध घोषित कर दिया है। प्रभाग क्रमांक 191 से चुनाव लड़ने वाली विशाखा राऊत के बाद दूसरे स्थान पर शिवसेना की उम्मीदवार प्रिया सदा सरवणकर (Priya Sada Sarvankar) रही थीं। ऐसे में राऊत का सदस्यत्व रद्द होने की स्थिति में प्रिया सरवणकर के नाम पर भी चर्चा हो सकती है। समिति के आदेश के अनुसार, विशाखा राऊत द्वारा चुनाव के दौरान प्रस्तुत जाति प्रमाणपत्र की जांच उपविभागीय अधिकारी तथा उपविभागीय दंडाधिकारी, पालघर के समक्ष की गई। जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारी को यह प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं था। इसके चलते प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया।

कुणबी जाति का रक्त संबंध साबित नहीं कर सकीं
राऊत ने कुणबी जाति वैधता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन के साथ शपथपत्र और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। हालांकि, समिति के अनुसार, इन दस्तावेजों के आधार पर वह कुणबी जाति के वैधता प्रमाणपत्र धारकों के साथ अपना रक्त संबंध साबित नहीं कर सकीं।

15 दिन में प्रमाणपत्र जमा करने का निर्देश
समिति ने आदेश मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर पालघर के उपविभागीय अधिकारी तथा उपविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र समिति के कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही आदेश के खिलाफ विभागीय आयुक्त, कोंकण विभाग (Konkan Division) के समक्ष निर्धारित अवधि में अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।