
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने जज बनने के लिए शुरुआती परीक्षा में शामिल होने के लिए तीन साल के अनिवार्य वकालत के अनुभव को घटाकर एक वर्ष कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली बेंच ने 2-1 के बहुमत से फैसला किया कि जज बनने की परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को जुडिशियल एकेडमी (Judicial Academy) में ट्रेनिंग लेने के अलावा एक साल का क्लर्कशिप भी करना होगा।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मई 2025 और मार्च 2027 के बीच आयोजित परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को अपने पुराने अनुभव का लाभ मिलेगा। बता दें कि 20 मई 2025 को उच्चतम न्यायालय ने जज बनने के लिए तीन वर्ष तक वकालत के अनुभव की अनिवार्यता बहाल करने का आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं।
वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्वेस (Senior Advocate Colin Gonsalves) ने दायर याचिका में कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने पांच लॉ कमीशन (reports from five Law Commissions) की रिपोर्ट पर विचार नहीं किया, जिसमें सर्वसम्मति से जज बनने के लिए बतौर वकील तीन साल की प्रैक्टिस की बात को खारिज की गई है। याचिका में दूसरे न्यायिक वेतन आयोग 2022 के रिपोर्ट का जिक्र किया गया था, जिसमें ऐसी किसी भी बाध्यता को लागू करने के पहले सभी पक्षों से सलाह-मशविरा करने पर जोर दिया गया है।
दरअसल, शुरुआत में जज के पद पर नियुक्त होने के लिए बतौर वकील तीन वर्ष का अनुभव अनिवार्य था लेकिन 2002 में उच्चतम न्यायालय ने तीन वर्ष के अनुभव को समाप्त करते हुए नये लॉ ग्रेजुएट को भी जज के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन करने का रास्ता खोल दिया था।
