
नई दिल्ली : (New Delhi) राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) (National Company Law Tribunal) द्वारा मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा (media tycoon Subhash Chandra) की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में कथित करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के बकाये के मुकाबले 6.5 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद जयराम रमेश (Congress General Secretary and MP Jairam Ramesh) ने इस फैसले को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 का मजाक बताते हुए कहा कि यह ‘हेयरकट’ नहीं बल्कि ‘मुंडन’ है।
जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा कि जब कर्जदार द्वारा बकाये की तुलना में बहुत कम राशि चुकाई जाती है तो ऋणदाताओं को होने वाले नुकसान को वित्तीय भाषा में ‘हेयरकट’ (‘haircut’) कहा जाता है। उन्होंने सुभाष चंद्रा मामले में स्वीकृत प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह सिर्फ हेयरकट नहीं है, यह वास्तव में मुंडन है और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 का पूरी तरह से उपहास उड़ाता है।”
बता दें कि एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में ऋणदाताओं के करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के निपटारे के लिए 6.5 करोड़ रुपये की भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसमें करीब 6.25 करोड़ रुपये ऋणदाताओं को दिए जाने हैं, जबकि 25 लाख रुपये समाधान प्रक्रिया की लागत के लिए रखे गए हैं।
इस प्रस्ताव के आधार पर ऋणदाताओं को स्वीकृत दावों की तुलना में करीब 99.97 प्रतिशत की कटौती स्वीकार करनी होगी। इस मामले में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस समेत कुछ ऋणदाताओं ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी।
इससे पहले एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ इस मामले में एकमत नहीं थी। दोनों सदस्यों के बीच मतभेद के बाद मामले को सुलझाने के लिए न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा (Judicial Member Nilesh Sharma) को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था। नीलेश शर्मा ने मंगलवार को आईबीसी की धारा 114 के तहत पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी।
