
समय पर जानकारी नहीं भरी तो अटक जाएगा वेतन
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra government) ने सरकारी कर्मचारियों का नया और विस्तृत ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय की इस मुहिम में नियमित कर्मचारियों के साथ अस्थायी, दैनिक वेतन, अंशकालिक और मानदेय पर कार्यरत कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।
सेवा से लेकर वेतन तक की जानकारी दर्ज होगी
डेटाबेस में कर्मचारी का सेवा कोड, नाम, जन्मतिथि, लिंग, पद, नियुक्ति और सेवानिवृत्ति की तारीख के साथ भविष्य निधि खाता, पैन, मोबाइल, ई-मेल, सामाजिक वर्ग, जाति, धर्म, मूल गांव और दिव्यांगता संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। वर्तमान पद, पदोन्नति की तारीख और जुलाई 2026 में प्राप्त वेतन का विवरण भी ऑनलाइन भरना होगा।
खाली पदों और वेतन खर्च का मिलेगा सटीक आंकड़ा
सरकार के अनुसार, इस डेटाबेस से राज्य में कार्यरत कर्मचारियों की वास्तविक संख्या, विभिन्न विभागों में खाली पदों और वेतन पर होने वाले कुल खर्च का अधिक सटीक आंकड़ा उपलब्ध होगा। इससे भर्ती, पदों की आवश्यकता और वेतन बजट से जुड़े फैसलों में मदद मिलेगी।
15 सितंबर से शुरू होगा ऑनलाइन विवरण
आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के कार्यक्रम के अनुसार 2 से 15 सितंबर तक संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन व्यवस्था की लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद 15 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक कर्मचारियों और पदों की जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद पहला सत्यापन प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा।
दिसंबर से फरवरी तक सुधार का मौका
ऑनलाइन जानकारी में गलती या कमी होने पर 1 दिसंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक सुधार किया जा सकेगा। सुधार के बाद दूसरा सत्यापन प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
प्रमाणपत्र नहीं तो वेतन बिल पर रोक
सरकार ने डेटाबेस की प्रक्रिया को वेतन भुगतान से जोड़ दिया है। नवंबर 2026 के वेतन बिल के साथ पहला प्रमाणपत्र लगाना जरूरी होगा। फरवरी 2027 के वेतन बिल, जिसका भुगतान मार्च में होगा, के साथ दूसरा प्रमाणपत्र देना होगा। दोनों प्रमाणपत्र नहीं होने पर संबंधित कार्यालय के वेतन बिल को मंजूरी नहीं मिलेगी।
ट्रेजरी से बाहर के कार्यालय भी दायरे में
यह व्यवस्था केवल सीधे कोषागार में वेतन बिल पेश करने वाले विभागों तक सीमित नहीं होगी। अन्य कार्यालयों और संस्थाओं को भी अपने कर्मचारियों के साथ रिक्त पदों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी।
1 जुलाई 2026 की स्थिति के आधार पर होगा रिकॉर्ड
इस प्रक्रिया में 1 जुलाई 2026 को सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को शामिल किया गया है। जुलाई 2026 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों का विवरण भी दर्ज करना होगा। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों से संबंधित आंकड़ों को एक ही मंच पर लाकर राज्य में मानव संसाधन का अद्यतन और व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना है।
