
मुंबई : (Mumbai) कांग्रेस के बीएमसी ग्रुप लीडर अशरफ आजमी (Congress BMC group leader Ashraf Azmi) ने लोअर परेल स्थित सेंचुरी मिल की करीब 6.17 एकड़ जमीन को 30 साल के लिए निजी डेवलपर को लीज पर देने के महानगरपालिका (Municipal Corporation) के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएमसी करीब 13 हजार करोड़ रुपये की विकास-संभावना वाली जमीन को लगभग 1,300 करोड़ रुपये में निजी डेवलपर को देने जा रही है।
आजमी के मुताबिक, सेंचुरी मिल की जमीन करीब 2.7 लाख वर्गफुट है और प्रस्ताव में डेवलपर को कम से कम 5 एफएसआई दिए जाने की बात है। इससे करीब 13 लाख वर्गफुट निर्माण की संभावना बनती है। लोअर परेल क्षेत्र में करीब एक लाख रुपये प्रति वर्गफुट के अनुमानित बाजार मूल्य के आधार पर उन्होंने इस विकास-संभावना का मूल्य करीब 13 हजार करोड़ रुपये बताया। उनका सवाल है कि इतनी बड़ी संभावित संपत्ति के बदले बीएमसी को केवल 1,300 करोड़ रुपये क्यों मिलेंगे।
गिरणी कामगारों के पुनर्वसन पर सवाल
आजमी ने कहा कि यह जमीन केवल महानगरपालिका की संपत्ति नहीं, बल्कि गिरणी कामगारों और मुंबई के मेहनतकश लोगों के संघर्ष से जुड़ी है। उनके अनुसार, बीएमसी ने इस जमीन के अधि (Supreme Court) का फैसला महानगरपालिका के पक्ष में आया।
उन्होंने मांग की कि जमीन को निजी डेवलपर को सौंपने से पहले यहां रह रहे गिरणी कामगार परिवारों के पुनर्वसन की स्पष्ट योजना सार्वजनिक की जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि पुनर्वसन कहां होगा, क्या प्रभावित परिवारों को इसी जमीन पर घर मिलेगा और निर्माण के दौरान उनके रहने की व्यवस्था कौन करेगा।
वैल्यूएशन सार्वजनिक करने की मांग
आजमी ने रेडी रेकनर दर, जमीन की पूरी वैल्यूएशन, प्रस्तावित लीज की शर्तें और डेवलपर की वित्तीय क्षमता सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने यह भी पूछा कि 1,300 करोड़ रुपये के सौदे की फंडिंग कौन करेगा और डेवलपर के डिफॉल्ट की स्थिति में बीएमसी के हितों की सुरक्षा कैसे होगी।
उन्होंने कहा कि जमीन को निजी विकास के लिए देने के बजाय गिरणी कामगारों के आवास, पीएपी पुनर्वसन, उद्यान, खुले स्थान और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। आजमी ने मांग की कि प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगाकर बीएमसी यह भी जांच करे कि जमीन को स्वयं विकसित कर मुंबई की जनता को दीर्घकालीन लाभ पहुंचाया जा सकता है या नहीं।
