
विधायक रईस शेख ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
मुंबई : (Mumbai) आगामी नवरात्रि उत्सव (Navratri festival) के दौरान गरबा-दांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम युवाओं के शामिल होने पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विश्व हिंदू परिषद की कथित नियमावली को लेकर समाजवादी पार्टी के भिवंडी (पूर्व) से विधायक रईस शेख (Raees Shaikh) ने राज्य सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। रईस शेख ने कहा कि भारत में त्योहार सामाजिक सद्भाव और एकता का माध्यम हैं। देश में विभिन्न धर्मों के त्योहारों में एक-दूसरे के शामिल होने की परंपरा रही है। ईद और रमजान (Eid and Ramadan) के दौरान भी अन्य धर्मों के लोग उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं। इसके बावजूद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा कथित तौर पर मुस्लिम समाज को निशाना बनाया जा रहा है।
संघ-भाजपा की भूमिका पर सवाल
शेख ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया न्यूयॉर्क दौरे के दौरान दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर समावेशी विचार की बात की जाती है, जबकि दूसरी ओर मुस्लिमों को गरबा-दांडिया से दूर रखने की अपील की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ और भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है।
‘संविधान के खिलाफ है प्रतिबंध’
रईस शेख ने कहा कि गरबा-दांडिया (Garba and Dandiya) में मुस्लिमों पर प्रतिबंध लगाने की अपील भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की यह ‘सांस्कृतिक पुलिसगिरी’ है। ऐसी भूमिका से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि त्योहार भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं और लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। इसलिए धार्मिक भावनाएं भड़काकर सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिशों पर राज्य सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए।
