
नई दिल्ली : (New Delhi) सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों (Saudi Arabia and Houthi rebels) के बीच जारी संघर्ष में पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। 8 सितंबर को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के चार शहरों पर हमला किया, जिसमें 73 लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। हमले का असर सऊदी के तेल कारोबार पर भी पड़ा और करीब चार लाख बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात करने वाला केंद्र ठप हो गया।
पाकिस्तान ने दिया मदद का संकेत
सऊदी की मदद को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Pakistan’s Defense Minister Khawaja Asif) ने कहा है कि अगर हूती हमले जारी रहते हैं तो पाकिस्तान मध्य पूर्व की जंग में उतर सकता है। उन्होंने कहा कि मक्का समझौता (‘Mecca Agreement’) सक्रिय हो गया है और इसके तहत सऊदी की मदद करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अलर्ट पर है।
क्या है मक्का समझौता?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की (Saudi Arabia, Pakistan, and Turkey) के बीच हुए मक्का समझौते में किसी एक देश पर हमला होने पर उसे तीनों पर हमला माना गया है। इसमें संयुक्त रक्षा अभ्यास, खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग बढ़ाने की बात है। इसी वजह से इसे ‘इस्लामिक NATO’ (‘Islamic NATO’) कहा जा रहा है।
सऊदी में 8 हजार पाकिस्तानी जवान
रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब में पाकिस्तान के करीब 8,000 जवान (8,000 Pakistani troops are deployed in Saudi Arabia) तैनात हैं। इसके बावजूद हूती हमलों के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई बड़ा सैन्य कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मक्का समझौता सिर्फ कागजी करार है या जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान और तुर्की वास्तव में सऊदी के साथ सैन्य मोर्चे पर उतरेंगे।
