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Mumbai : दहीहंडी में लावणी के नाम पर हो रहा धागड़धिंगा अनुचित’: विश्वास पाटील

Mumbai: 'Dhagaddhingha' being performed in the name of Lavani at Dahihandi is 'inappropriate': Vishwas Patil

पैसों के लिए लावणी के मूल स्वरूप में बदलाव पर जताई चिंता
मुंबई : (Mumbai)
अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन (All India Marathi Sahitya Sammelan) के अध्यक्ष और वरिष्ठ उपन्यासकार विश्वास पाटील (Vishwas Patil) ने दहीहंडी उत्सव में लावणी के नाम पर होने वाले कार्यक्रमों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दहीहंडी में लावणी के नाम पर चल रहा धागड़धिंगा लोककला और लावणी के मूल स्वरूप में पैसों के लिए आई ‘सूजन’ है। उन्होंने लोककलाओं की गरिमा और पारंपरिक स्वरूप बनाए रखने की जरूरत बताई।

ग्रामीण लोककलाओं का गौरव

विश्वास पाटील ने ग्रामीण महाराष्ट्र में गांव-गांव पीढ़ियों से संरक्षित लोककलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कलाओं ने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि लोककला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के जीवन, परंपरा और भावनाओं से जुड़ी हुई है।

लोककला ऋषितुल्य व्यवस्था : शेलार

सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशिष शेलार (Cultural Affairs Minister Adv. Ashish Shelar) ने कहा कि लोककला मानव मन को आनंद देने वाली ऋषितुल्य व्यवस्था है। मानव विकास के दौरान मन में उठने वाले सवालों, हलचल और दुख के समाधान के लिए विभिन्न सामाजिक और आध्यात्मिक व्यवस्थाएं विकसित हुईं। कुलदेवता और उपास्य देवताओं की आराधना के साथ समाज ने ज्ञान, मनोरंजन और प्रबोधन के लिए लोककला की व्यवस्था विकसित की।

लोककलाकारों का जीवन कैमरे में सहेजा

प्रभादेवी स्थित पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी के करिश्मा सभागृह में महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग और सांस्कृतिक कार्य संचालनालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रकाशचित्रों से लोककलावंतों का स्मृतिवंदन’ पुस्तक का विमोचन हुआ। लेखक एवं फोटोग्राफर डॉ. नितीन सोनावणे ने पुस्तक में महाराष्ट्र के विभिन्न लोककलाकारों के जीवन और कला को तस्वीरों के माध्यम से दस्तावेज के रूप में संरक्षित किया है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां

पुस्तक विमोचन के बाद शेखर निरंजन भाकरे (Shekhar Niranjan Bhakare) और उनके सहकलाकारों ने विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में कला एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अशोक हांडे, डॉ. तात्याराव लहाने, पूर्व मुख्य सचिव जे. पी. डांगे, गजल गायक भीमराव पांचाळे, नंदेश उमप और खंडूराज गायकवाड सहित कई कलाकार मौजूद थे। कार्यक्रम का आयोजन और स्वागत सांस्कृतिक कार्य संचालनालय के संचालक प्रशांत संगीता कैलास खेडेकर ने किया।