
दोषियों पर सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की मांग
अमरावती : (Amravati) अमरावती जिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (Neonatal Intensive Care Unit) (NICU) में लगी आग में तीन नवजात बच्चों की मौत के मामले में सामने आई जांच रिपोर्ट को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी ने सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र पातोडे ने दावा किया कि जांच रिपोर्ट से संगठन द्वारा पहले लगाए गए कई आरोप सही साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना महज हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों और अग्निसुरक्षा नियमों की अनदेखी का परिणाम है।
पातोडे के अनुसार, जांच में एनआईसीयू में इस्तेमाल किए जा रहे शिलर कंपनी के ‘ग्राफनेट एडवांस’ वेंटिलेटर में खराबी सामने आई है। उनका दावा है कि उपकरण में शॉर्ट सर्किट के बाद पानी का झटका निकला और इसके बाद विस्फोट से आग लगी। उन्होंने कहा कि इसी उपकरण में वर्ष 2022 में भी आग लग चुकी थी, इसके बावजूद आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा जांच के बिना उसे दोबारा इस्तेमाल किया गया।
अग्निसुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों का दावा
वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) ने दावा किया कि जांच रिपोर्ट में अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था में भी गंभीर कमियां सामने आई हैं। धुआं पहचानने वाले सेंसर और फायर अलार्म प्रणाली मैनुअल मोड में बंद थी। फायर पंप हाउस पर ताला लगा था और आपातकालीन निकासी के लिए केवल एक दरवाजा उपलब्ध था। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे।
कंपनियों पर कार्रवाई की मांग
पार्टी ने कहा कि जैव-चिकित्सकीय उपकरणों के रखरखाव का ठेका लेने वाली मेसर्स एओवी इंटरनेशनल ने भी उचित तकनीकी सलाह और रखरखाव नहीं किया। कंपनी को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू होने तथा शिलर कंपनी को भी काली सूची में डालने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
पातोडे ने कहा कि स्वास्थ्य उपनिदेशक डॉ. सुनीलकुमार वाकचौरे, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार, डॉ. अरुण सालुंके, प्रशासनिक अधिकारी संदीप तारगे और संबंधित इलेक्ट्रिशियन को निलंबित किया गया है, लेकिन यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
‘निलंबन नहीं, आपराधिक कार्रवाई जरूरी’
पातोडे ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी निर्धारित करने की मांग की।
भंडारा हादसे के बाद की गई तैयारी पर सवाल
वंचित बहुजन आघाड़ी ने सवाल उठाया कि भंडारा की घटना के बाद ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुझाए गए उपाय अमरावती जिला अस्पताल में क्यों लागू नहीं किए गए। पार्टी ने राज्य के सभी सरकारी एनआईसीयू, विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (Special Neonatal Care Units) (SNCUs) और गहन चिकित्सा कक्षों की अग्निसुरक्षा, विद्युत सुरक्षा तथा जैव-चिकित्सकीय सुरक्षा की तत्काल जांच कराने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
मृत बच्चों के परिजनों को दो-दो करोड़ रुपये मुआवजा
पातोडे ने अमरावती अग्निकांड (Amravati fire) में जान गंवाने वाले तीन नवजात बच्चों के परिवारों को दो-दो करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि केवल निलंबन के जरिए मामले को दबाने या वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया तो वंचित बहुजन आघाड़ी तीव्र जनआंदोलन करेगी। साथ ही पार्टी इस मामले में कानूनी लड़ाई भी आगे बढ़ाएगी।
