
रक्षा मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय वायु सेना की भूमिका पर जोर दिया
नई दिल्ली : (New Delhi) ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS summit) में हिस्सा लेने आये चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi and Chinese President Xi Jinping) की द्विपक्षीय वार्ता में भले ही सीमा विवाद का मुद्दा न उठा हो, लेकिन रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) (Line of Actual Control) पर चीनी सेना की तैनाती में काफी कमी आने की बात कही गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तरों पर द्विपक्षीय बातचीत से उत्तरी सीमाओं पर सकारात्मक विकास हुआ है। साथ ही रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (‘Operation Sindoor’) में भारतीय वायु सेना की भूमिका पर जोर दिया है।
यह रिपोर्ट चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट से घर लौटने के एक दिन बाद आई है। रक्षा मंत्रालय ने 2025-26 के लिए अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि भारतीय सेना ने उत्तरी सीमाओं को सुरक्षित किया। भारत और चीन के बीच राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य स्तर पर आपसी बातचीत से भी अच्छे संबंध विकसित हुए, जिससे स्थिरता आई। रिपोर्ट में दोनों देशों के बीच बढ़े हुए राजनयिक और सैन्य जुड़ाव के बारे में बताते हुए कहा गया है कि दोनों देश दुश्मनी के बजाय पार्टनरशिप और शांति से मतभेदों को सुलझाने की प्रतिबद्धता चाहते हैं। यह भी बताया गया है कि भारत के लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) और ट्रेनिंग एरिया में 10 ब्रिगेड साइज की सेना तैनात करने के कदम के बाद उत्तरी बॉर्डर पर चीनी सेना की तैनाती में काफ़ी कमी आई है।
सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि एलएसी के साथ सभी सेक्टर में भारतीय सेना अच्छी तरह से तैनात और किसी भी अचानक आने वाली स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। वर्ष 2025 में उत्तरी मोर्चे पर पूरी स्थिति के बारे में बताते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अलग-अलग लड़ाकू ब्रांच जैसे पैदल सेना, टैंक, आर्टिलरी और एयर डिफेंस एक ही छत के नीचे स्वतंत्र रूप से और सबसे असरदार तरीके से लड़ने के लिए तैनात हैं। साल 2025 में उत्तरी बॉर्डर के दूसरी तरफ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) (People’s Liberation Army) की तैनाती में काफी कमी देखी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च और जुलाई 2025 में वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन (Working Mechanism for Consultation and Coordination) (डब्ल्यूएमसीसी) की 33वीं और 34वीं राउंड की बैठक के साथ नए सिरे से बातचीत हुई।
इसके अलावा इस साल भारत-चीन सीमा के सवाल को सुलझाने के लिए स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स की बातचीत भी फिर से शुरू हुई, जिसके दो राउंड दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में हुए। रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (Shanghai Cooperation Organisation) (एससीओ) समिट के लिए चीन गए थे। इससे पहले राष्ट्रपति जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे। शनिवार को ब्रिक्स समिट के दौरान मोदी और शी के बीच हुई बातचीत में कई मुद्दों पर बात हुई, जिसमें उनका व्यापार घाटा कम करना, आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटना और बहुपक्षीय मंच पर फेयर ट्रेड पक्का करना शामिल है। इस बैठक में एलएसी के मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई।
रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय वायु सेना की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि पूरे पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें नूर खान और रहीम यार खान एयर बेस जैसी जगहों को निशाना बनाया गया। वायु सेना ने जवाबी ड्रोन और यूएवी हमलों के दौरान भारतीय एयरस्पेस की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाई। एक लेयर्ड एयर डिफेंस ग्रिड में स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम, पेचोरा और ओएसए-एके प्लेटफ़ॉर्म को असरदार तरीके से तैनात किया गया था। इंटीग्रेटेड एयर कमांड और कंट्रोल सिस्टम ने रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन को मुमकिन बनाया, जिससे हवाई खतरों को बेअसर करने और पूरे संघर्ष के दौरान नेट-सेंट्रिक ऑपरेशन बनाए रखने में मदद मिली।
रक्षा मंत्रालय ने अपनी सालाना रिपोर्ट में सबसे लंबे समय तक जमीन से हवा में मार करने वाले विमानों पर रोशनी डाली है। एस-400 यूनिट के एक ऑपरेशन में एक पाकिस्तानी स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट को 314 किमी. की दूरी से सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया। इस ऑपरेशन से वायु सेना ने एयर डिफेंस के नियमों को फिर से लिखा और भारतीय रडार ने चुपचाप और बिना किसी गलती के एकदम सही तरीके से खतरे को ट्रैक किया। लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल को उसकी दूर की सीमा तक गाइड किया गया। इस जरूरी ऑपरेशन ने दुश्मन को साबित कर दिया कि जमीन या हवा में कोई भी जगह वायु सेना के हमलों की पहुंच से बाहर नहीं थी।
जम्मू एवं कश्मीर के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना की लगातार कोशिशों की वजह से जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति पूरी तरह से काबू में है। जनता ने विकास का रास्ता चुना है और सभी सरकारी और भारतीय सेना के कार्यों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे हिंसा का स्तर कम हुआ है, विरोध प्रदर्शन कम हुए हैं और पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर और लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास हालात काफी बदल गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 एवं 12 मई 2025 को डायरेक्टर जनरल्स ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) स्तर की बातचीत के बाद हालात काफी हद तक स्थिर हो गए हैं, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
