
देहरादून : (Dehradun) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने कांग्रेस पर राजनीतिक मुद्दों के अभाव में झूठ, भ्रम और बेबुनियाद आरोपों के सहारे नैरेटिव खड़ा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के आरोप तथ्य सामने आने के बाद कमजोर पड़ जाते हैं और सरकार हर आरोप का जवाब दस्तावेज एवं प्रमाण के साथ देने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में हल्द्वानी की एक घटना, उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (Uttarakhand Investment and Infrastructure Development Board) (UIIDB) और बिजली खरीद को लेकर कांग्रेस के आरोपों का उल्लेख किया।
हल्द्वानी की घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ने के कांग्रेस के आरोप पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में सामने आए तथ्यों में घटना से जुड़े पांच लोगों के अनुसूचित जाति समाज से होने की बात सामने आई। उन्होंने कहा कि संवेदनशील सामाजिक विषयों पर तथ्यों की पुष्टि किए बिना राजनीति करना उचित नहीं है।
यूआईआईडीबी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने 7,000 बीघा जमीन दिए जाने का आरोप लगाया, जबकि सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि बोर्ड को अब तक कुल 45 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी का उद्देश्य पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास के माध्यम से निवेश, आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
ऊर्जा खरीद के मुद्दे पर धामी ने कहा कि विपक्ष को सवाल उठाने के साथ अपने शासनकाल के फैसलों का भी हिसाब देना चाहिए। उनके अनुसार, कांग्रेस सरकार (Congress government) के समय किए गए गैस पावर करार के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को गैस आधारित बिजली के लिए 31.71 रुपये प्रति यूनिट तक भुगतान करना पड़ा। वर्तमान सरकार ने 1320 मेगावाट बिजली की व्यवस्था करीब 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से 25 वर्षों के लिए सुनिश्चित की है।
उन्होंने कहा कि पीक ऑवर में राज्य को कई बार महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसे में दीर्घकालिक और अपेक्षाकृत कम दर पर बिजली की उपलब्धता ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों के आधार पर होने चाहिए।
अंकिता भंडारी प्रकरण (Ankita Bhandari case) पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही कानूनी कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि मामले में तीनों दोषियों को निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है और अगस्त 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। मुख्यमंत्री के अनुसार, अंकिता के माता-पिता की मांग पर राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति की थी और सीबीआई ने फरवरी 2026 में मामला दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सरकार पहले दिन से दृढ़ता के साथ खड़ी रही है और आगे भी कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने संवेदनशील प्रकरणों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक आरोप का जवाब तथ्य, दस्तावेज और पारदर्शिता के साथ देगी। लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन जनता के बीच तथ्यात्मक बहस होनी चाहिए।
