
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee) ने उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में याचिका दायर कर निर्वाचन आयोग (Election Commission) के उस फ़ैसले को चुनौती दी है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के दो विरोधी गुटों के बीच विवाद के चलते पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया था।
निर्वाचन आयोग ने 18 सितंबर को दोनों विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित करने का आदेश दिया था। 17 सितंबर को निर्वाचन आयोग ने विवाद पर अंतिम फैसला होने तक दोनों समूहों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (‘All India Trinamool Congress’) नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। अपने अंतरिम आदेश में निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं का पक्ष सुनने के बाद कहा कि इस मामले में चुनाव चिह्न के आरक्षण और आवंटन के प्रावधानों के तहत आयोग द्वारा ठोस निर्णय लिए जाने की आवश्यकता है। याचिका में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है।
जून में, 58 बागी विधायकों ने ममता गुट के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय (Sovandeb Chattopadhyay) की जगह पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना और स्पीकर से मान्यता भी हासिल कर ली। पार्टी के 28 साल के इतिहास में यह पहली बार था जब उसमें फूट पड़ी। कुछ ही दिन बाद ये बगावत संसद तक पहुंच गई। काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) की अगुवाई में 20 लोकसभा सांसदों ने कम जानी-मानी एनसीपीआई का दामन थाम लिया और स्पीकर ओम बिरला (Speaker Om Birla) को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को एक अलग गुट के तौर पर समर्थन दिया, जिससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई।
