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Mumbai : UPI लेन-देन पर 0.4% MDR का फैसला वापस ले केंद्र : महेश तपासे

Mumbai: Center should withdraw decision to impose 0.4% MDR on UPI transactions: Mahesh Tapase

मुंबई : (Mumbai) ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) (MDR) लागू करने के प्रस्ताव को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Sharad Pawar) के वरिष्ठ नेता महेश तपासे ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने केंद्र सरकार और NPCI से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की।

छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा बोझ

तपासे ने कहा कि यूपीआई को देश के छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और फेरीवालों ने अपनी मेहनत से व्यापक स्तर पर अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब यूपीआई भारत की खुदरा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, तब इसी व्यवस्था को सफल बनाने वाले छोटे कारोबारियों पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार लंबे समय से डिजिटल इंडिया और यूपीआई (Digital India and UPI) को आम लोगों के लिए मुफ्त, तेज और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान व्यवस्था के रूप में पेश करती रही है। ऐसे में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर MDR लगाने का निर्णय छोटे व्यापारियों के हितों को प्रभावित कर सकता है।

सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल

तपासे ने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीतियों में दोहरा रवैया दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों से जुड़े बड़े कर्जों के राइट-ऑफ के मामलों में सरकार अलग रवैया अपनाती है, जबकि छोटे दुकानदार या सब्जी विक्रेता पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डाला जा रहा है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई छोटा व्यापारी ₹2,500 का यूपीआई भुगतान स्वीकार करता है तो उस पर शुल्क क्यों लगाया जाए। तपासे ने कहा कि इस फैसले का अंतिम असर किराना दुकानदारों, स्थानीय व्यापारियों और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है।

सार्वजनिक बैंकों के मुनाफे का हवाला

तपासे ने अर्थ मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड संयुक्त शुद्ध लाभ दर्ज किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इतना मुनाफा कमा रहे हैं, तो छोटे व्यापारियों पर MDR का अतिरिक्त बोझ डालने की आवश्यकता क्यों है।

निर्णय वापस लेने की मांग

तपासे ने कहा कि यूपीआई को सार्वजनिक हित की डिजिटल भुगतान सुविधा के रूप में विकसित किया गया था, न कि सरकार या बैंकिंग क्षेत्र के लिए आय का माध्यम बनाने के लिए। उन्होंने केंद्र सरकार और NPCI से ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों के हित में सरकार को इसके लागू होने से पहले ही फैसला वापस लेना चाहिए।