
नई दिल्ली : (New Delhi) अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के (Shri Ram Janmabhoomi Temple in Ayodhya) चढ़ावा की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) (Special Investigation Team) दो दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल करेगी। यूपी एसआईटी की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने उच्चतम न्यायालय में सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली बेंच को यह सूचना दी।
सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि जांच के लिए 90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है, इसलिए अगर 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो इस मामले के आरोपितों को डिफॉल्ट जमानत मिल जाएगी। ऐसे में 25 सितंबर की सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। आज सुनवाई के दौरान एसआईटी ने जांच से सम्बन्धित ताजा स्टेटस रिपोर्ट (updated status report) उच्चतम न्यायालय में दाखिल की है।
इससे पहले 17 अगस्त को कोर्ट ने एसआईटी को जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने एसआईटी को दान में कथित चोरी के मामले में अब तक की जांच की प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया था।
यूपी सरकार ने 27 जुलाई को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि दान की कथित चोरी की जांच के लिए नई एसआईटी गठित कर दी गई है। उसके बाद उच्चतम न्यायालय ने एक फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि यूपी सरकार ने लखनऊ के आईटी एस किरण की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन किया है। कोर्ट ने 13 जुलाई को ट्रस्ट और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने एसआईटी के गठन से जुड़े रिकॉर्ड तलब किया था।
याचिका दो वकीलों अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव (Ajay Kumar Rai and Dinesh Kumar Yadav) ने दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार, यूपी सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देश देने की मांग की गई है कि वो वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक मेकानिज्म स्थापित करें क्योंकि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
इसके पहले भी एक वकील अनूप अवस्थी (lawyer named Anup Awasthi) ने उच्चतम न्यायालय को पत्र लिखकर कहा था कि ये मसला देश के करोड़ों लोगों की आस्था के साथ जुड़ा हुआ है। पत्र में मांग की गई है कि इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में की जाए। पत्र में कहा गया है कि ये मंदिर 2020 में आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बने ट्रस्ट द्वारा संचालित है। इसकी प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को की गई थी। उसके बाद से इस मंदिर का दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु रोजाना पहुंचते हैं और मंदिर के दानपात्र में दान देते हैं।
