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Dehradun : उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म

Dehradun: Uttarakhand Madrasa Board Abolished

देहरादून : (Dehradun) उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में (minority education system of Uttarakhand) बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड (Uttarakhand Madrasa Board) को एक जुलाई से समाप्त करने का फैसला किया है। इसके बाद मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता व संचालन की जिम्मेदारी उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (Uttarakhand Minority Education Authority) संभालेगा।

नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के 452 पंजीकृत मदरसों को पहले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता लेनी होगी। इसके बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी।
सरकार ने संस्थानों की मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति, शिक्षकों की योग्यता और सामाजिक सौहार्द जैसे मानक तय किए हैं। नई मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध होगी।

शिक्षा व्यवस्था सुधार में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने कहा कि नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। सरकार सभी नागरिकों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास (Social Welfare and Minority Welfare Minister Khajan Das) ने इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि नई प्रक्रिया से संस्थानों के संचालन में जवाबदेही बढ़ेगी।

तत्काल बंद नहीं होंगे मदरसे
हालांकि, सरकार के निर्णय के बाद भी पंजीकृत मदरसे तत्काल बंद नहीं होंगे। उन्हें नई संबद्धता और मान्यता प्रक्रिया पूरी करने के बाद संचालित किया जा सकेगा। नई नियमावली को उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने “उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों संबंधी मान्यता नियमावली-2026” (“Uttarakhand Minority Educational Institutions Recognition Rules-2026”) के तहत मंजूरी दी है। यह व्यवस्था एक जुलाई से प्रभावी होगी।