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New Delhi : फोर्स्ड लेबर के नाम पर भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ

New Delhi: 10% Additional Tariff on India Over Forced Labor Concerns

नई दिल्ली : (New Delhi) अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह कदम कथित तौर पर फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) (forced labor) से जुड़ी चिंताओं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में श्रम मानकों के पालन को लेकर उठाया गया है। भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, ब्रिटेन और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों (Bangladesh, Pakistan, Sri Lanka, the UK, and some Latin American nations) को भी इस श्रेणी में रखा गया है। फोर्स्ड लेबर का अर्थ है किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध या दबाव में काम कराना। यदि किसी श्रमिक को नौकरी छोड़ने की स्वतंत्रता न हो, धमकी देकर काम कराया जाए, वेतन रोका जाए या उसके दस्तावेज जब्त कर लिए जाएं, तो ऐसी स्थिति जबरन मजदूरी मानी जा सकती है।अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)I (International Labour Organization) फोर्स्ड लेबर को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है।

कम वेतन हमेशा फोर्स्ड लेबर नहीं

सिर्फ कम मजदूरी मिलने से किसी काम को फोर्स्ड लेबर नहीं कहा जा सकता। कानूनी तौर पर जबरन मजदूरी साबित करने के लिए दबाव, धमकी, हिंसा, कर्ज या स्वतंत्रता पर नियंत्रण जैसे तत्वों का होना जरूरी माना जाता है।

फोर्स्ड लेबर के प्रमुख संकेत

नौकरी छोड़ने की अनुमति न होना,धमकी या हिंसा का डर,पासपोर्ट या पहचान पत्र जब्त करना,वेतन रोकना,कर्ज के बोझ में बांधकर काम कराना आवाजाही पर प्रतिबंध,भर्ती के नाम पर भारी शुल्क वसूलना,बच्चों से जबरन या खतरनाक काम कराना, बंधुआ मजदूरी और कर्ज का जाल।फोर्स्ड लेबर का एक आम रूप बंधुआ मजदूरी है। कई मामलों में मजदूरों को नौकरी दिलाने के नाम पर कर्ज दिया जाता है और बाद में उन्हें बताया जाता है कि कर्ज चुकाए बिना वे नौकरी नहीं छोड़ सकते। इससे वे लंबे समय तक शोषण का शिकार बने रहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में क्यों अहम है यह मुद्दा?

आज अधिकांश उत्पाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के जरिए तैयार होते हैं। किसी उत्पाद के निर्माण की प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर फोर्स्ड लेबर का इस्तेमाल पाया जाता है, तो पूरा उत्पाद विवादों में आ सकता है। यही कारण है कि विकसित देश अब उत्पाद की कीमत के साथ-साथ उसके उत्पादन की परिस्थितियों पर भी ध्यान दे रहे हैं।अमेरिका का कहना है कि फोर्स्ड लेबर से बने उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं क्योंकि उनमें श्रमिकों को उचित वेतन, सुरक्षा और स्वतंत्रता नहीं मिलती। इससे नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान होता है। इसी वजह से अमेरिका इसे मानवाधिकार और निष्पक्ष व्यापार दोनों का मुद्दा मानता है।

भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ का क्या मतलब है?

अमेरिका ने भारत को उन देशों के समूह में रखा है जिनके कुछ आयातित उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत के सभी उद्योगों या सभी उत्पादों पर फोर्स्ड लेबर का आरोप लगाया गया है। इसे अधिकतर व्यापारिक दबाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

भारतीय निर्यातकों पर क्या असर पड़ सकता है?

अतिरिक्त टैरिफ लागू होने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं। इससे अमेरिकी खरीदार अन्य देशों के विकल्प तलाश सकते हैं और भारतीय निर्यातकों पर कीमतें कम रखने का दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार निम्न क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ने की आशंका है,टेक्सटाइल और गारमेंट्स,चमड़ा उद्योग,रत्न एवं आभूषण,कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान (textiles and garments, the leather industry, gems and jewelry, agricultural products, and engineering goods)।हालांकि वास्तविक प्रभाव उत्पाद, मौजूदा शुल्क संरचना और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुपालन को और मजबूत करना होगा। इससे न केवल ऐसे व्यापारिक प्रतिबंधों का जोखिम कम होगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।