
मुंबई। (Mumbai) महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) (Maharashtra Public Service Commission) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा कथित पेपर लीक के आरोपों को लेकर विवादों में घिर गई है। आयोग का कहना है कि उसे परीक्षा रद्द करने की मांग वाला एक ईमेल मिला था, लेकिन बाद में उसी शिकायतकर्ता ने स्वीकार कर लिया कि उसकी शुरुआती शिकायत झूठी थी। इसके बावजूद आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी शिकायतों की जांच कराने और पूरा मामला पुलिस को सौंपने का फैसला किया है।
22 मार्च को हुई थी परीक्षा, 506 अभ्यर्थी इंटरव्यू तक पहुंचे
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार (MPSC Chairman Vivek Bhimanwar) ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 22 मार्च को ऑफलाइन आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए करीब 45 हजार उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से लगभग 33,200 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। 12 जून को परिणाम घोषित किए गए, जिसके बाद 506 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। इंटरव्यू प्रक्रिया 1 से 22 जुलाई तक चली और 22 जुलाई की शाम अंतिम मेरिट सूची जारी कर दी गई।
पेपर लीक का ईमेल मिलते ही हरकत में आया आयोग
आयोग के मुताबिक, 21 जुलाई को एक ईमेल के जरिए परीक्षा का पेपर लीक (paper leak was made via email on July 21) होने का आरोप लगाया गया और पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग की गई। आयोग ने शिकायतकर्ता से आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे। इसके बाद 23 जुलाई को एक और ईमेल भेजा गया, जिसमें दावा किया गया कि कुछ अभ्यर्थियों के पास परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र मौजूद था। शिकायत के साथ कुछ कथित व्हाट्सएप चैट भी साझा किए गए।
शिकायतकर्ता ने खुद कबूली अपनी गलती
जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने एक नया ईमेल भेजकर स्वीकार किया कि उसकी पहली शिकायत गलत थी। उसने बताया कि उसका एक दोस्त परीक्षा में असफल हो गया था और उसे लगा कि यदि पेपर लीक का आरोप लगाया जाएगा तो परीक्षा रद्द हो सकती है और दोबारा परीक्षा देने का मौका मिल जाएगा।
शिकायत वापस लेने के बावजूद जांच जारी
MPSC ने स्पष्ट किया है कि शिकायत वापस लेने के बावजूद मामले को बंद नहीं किया जाएगा। आयोग का कहना है कि एक अन्य अभ्यर्थी अब भी पेपर लीक का दावा कर रहा है। ऐसे में सभी शिकायतों, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस को सौंपा जाएगा मामला
आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद पूरा मामला पुलिस को सौंप दिया जाएगा, ताकि कथित पेपर लीक के आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि परीक्षा में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं।
