
नई दिल्ली/मुंबई : (New Delhi/Mumbai) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय (Tuhin Kanta Pandey) ने बुधवार को बाजार भागीदारों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समापन नीलामी सत्र (सीएएस) को बदनाम करने या इसमें किसी भी प्रकार का हेरफेर (मैनिप्युलेशन) करने के प्रयास से बहुत सख्ती और तुरंत निपटा जाएगा।
सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडेय ने यहां उद्योग संगठन फिक्की (organized by industry body FICCI) द्वारा आयोजित कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम सीएएस में हेरफेर को अपेक्षाकृत आसानी से पकड़ सकते हैं। सीएएस पारदर्शिता के लिए है। अगर किसी को लगता है कि वे इस नई प्रणाली को बदनाम करने के लिए सीएएस में हेरफेर करेंगे, तो वे मुसीबत में पड़ेंगे।’’
तुहिन कांत पांडेय ने आगाह किया कि समापन नीलामी सत्र (सीएएस) (Closing Auction Session) यानी बाजार बंद होने के बाद शेयर के अंतिम भाव तय करने की व्यवस्था को ‘‘बदनाम’’ करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ पूंजी बाजार नियामक सख्ती से कार्रवाई करेगा। सीएएस को 03 अगस्त को लागू किए जाने के बाद बाजार भागीदारों की ओर से जताई गई विभिन्न चिंताओं के बीच पांडेय ने कहा कि सीएएस में हेरफेर पकड़ने की सेबी की क्षमता उस पुरानी मात्रा भारांश औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) प्रणाली की तुलना में अधिक है, जिसकी जगह इसे लागू किया गया है।
सेबी प्रमुख ने कहा कि सीएएस व्यवस्था में भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से म्यूचुअल फंड तथा अपने खाते से कारोबार करने वाले ट्रेडरों के द्वारा इसे अपनाए जाने का उल्लेख किया। पांडेय ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सीएएस में भागीदारी में सुधार हो रहा है और आगे भी इसमें सुधार होगा। हम भागीदारी में आ रही बाधाओं को देख रहे हैं।’’
सेबी ने बाजार में हेरफेर रोकने और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सीएएस शुरू किया है। इस व्यवस्था के तहत कारोबार समाप्त होने से पहले निर्धारित समयावधि में खरीद और बिक्री के ऑर्डर को तत्काल निष्पादित करने के बजाय एकत्र किया जाता है और नीलामी आधारित ऑर्डर मिलान प्रक्रिया के तहत उनको मिलाया जाता है। सेबी के अनुसार दुनिया के प्रमुख बाजारों में पिछले दो वर्षों तक सीएएस जैसी व्यवस्था अपनाई गई है।
