
नई दिल्ली : (New Delhi) देश में चीनी की बढ़ती खुदरा कीमतों से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। उद्योग की शीर्ष संस्था इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (Indian Sugar & Bio-Energy Manufacturers Association) (इस्मा) ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी का कोई संकट नहीं है और स्टॉक पर्याप्त है।
इस्मा अध्यक्ष नीरज शिरगाओकर (ISMA President Neeraj Shirgaokar) ने कहा कि दामों में हालिया तेजी के पीछे उत्पादन नहीं बल्कि बाजार की कृत्रिम गतिविधियां हैं। उन्होंने सट्टेबाजी और बड़े व्यापारियों द्वारा जमाखोरी को मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण बताया।शिरगाओकर के अनुसार प्रतिकूल मौसम के चलते गन्ने की आवक पर असर पड़ा, जिससे बाजार में अस्थायी दबाव बना। कम बारिश और अत्यधिक गर्मी के कारण चीनी का कुल उत्पादन अनुमान से कुछ कम रहा, जिसका फायदा जमाखोरों ने उठाया।
जल्द ही नीचे आएंगे खुदरा दाम
उपभोक्ताओं को राहत कब मिलेगी, इस सवाल पर इस्मा ने कहा कि जल्द ही खुदरा दाम नीचे आएंगे। संस्था का मानना है कि भंडारण पर सख्ती और नई आवक से आपूर्ति सामान्य होगी, जिससे कीमतें स्थिर होकर गिरेंगी।बाजार को स्थिर रखने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने भी मोर्चा संभाल लिया है। जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट और साप्ताहिक निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कृत्रिम कमी का माहौल न बन सके।
इथेनाल के लिए डायवर्जन पहले से तय
इथेनॉल कार्यक्रम के मुद्दे पर इस्मा ने कहा कि ऐसा नहीं है। कुल चीनी में इथेनॉल के लिए डायवर्जन पहले से तय है और अब कार्यक्रम में 75 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित इथेनॉल का हो गया है, जबकि चीनी का हिस्सा घटकर 25 प्रतिशत रह गया है। अध्यक्ष ने बताया कि इथेनॉल से हुए राजस्व के दम पर मिलों ने 20 अगस्त 2026 तक किसानों के 97 प्रतिशत बकाये का भुगतान कर दिया है।
वैश्विक बाजार का पड़ रहा असर
भुगतान मिलने से गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अगली बुवाई में तेजी की उम्मीद है। वैश्विक बाजार का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का भाव 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन था, जो 20 अगस्त को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गया। यानी दो महीने में 16 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई है।
2016-17 जैसा संकट नहीं
संगठन ने कहा कि मौजूदा स्थिति 2016-17 के संकट जैसी नहीं है। उस साल सूखे के कारण उत्पादन घटकर मात्र 203 लाख मीट्रिक टन (LMT) रह गया था, जबकि इस वर्ष 279 LMT का मजबूत उत्पादन हुआ है। आगे बाजार का रुख सकारात्मक रहने की उम्मीद है। सरकार के कदमों के बाद पिछले कुछ दिनों में दामों में नरमी शुरू हुई है। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई सत्र से अक्तूबर में उत्पादन 4 लाख टन से बढ़कर 10 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
