
नई दिल्ली : (New Delhi) अमेरिका और ईरान द्वारा एक दूसरे के ठिकानों पर नए हमलों की शुरुआत करने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर कच्चे तेल की कीमत (Crude oil prices) में तेजी का रुख बन गया है। इस उछाल के कारण ब्रेंट क्रूड आज 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के पार चला गया। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गया है।
अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में ईरान के एक द्वीप में दो लॉन्चर्स पर हमला करने के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है। अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन में दो अमेरिकी बेस पर हमला कर दिया। दोनों देशों द्वारा एक दूसरे के ठिकानों पर हमला करने की वजह से पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तेजी के रूप में नजर आ रहा है।
आज ब्रेंट क्रूड ने 1.35 डॉलर प्रति बैरल उछल कर 89.455 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग शुरू होने के कुछ देर बाद ही इसकी कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। तनाव की आशंका के कारण भारतीय समय के मुताबिक सुबह 10 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 90.98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि कुछ देर बाद इसमें मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। भारतीय समय के मुताबिक दोपहर 11:30 बजे ब्रेंट क्रूड 2.69 डॉलर प्रति बैरल यानी 3.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 90.79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (West Texas Intermediate) (WTI) क्रूड की ट्रेडिंग आज 1.29 डॉलर प्रति बैरल की तेजी के साथ 84.69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से शुरू हुई। शुरुआत में ही कुछ देर के लिए यह फिसल कर 84.11 डॉलर प्रति बैरल तक आया। इसके बाद इसके भाव में तेजी आ गई और थोड़ी देर में ही यह उछल कर 85.96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। भारतीय समय के मुताबिक दोपहर 11:30 बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.33 डॉलर प्रति बैरल यानी 2.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 85.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए नए हमलों का सिलसिला अगर जारी रहा तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में उबाल आ सकता है। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा कंट्रोल हासिल करने के लिए ही ईरान के द्वीप पर दो लॉन्चर्स पर हमला किया है। इसके जवाब में ईरान ने भी जॉर्डन के अमेरिकी बेस पर हमला कर साफ कर दिया है कि वो अमेरिकी हमलों के सामने सरेंडर नहीं करेगा। दोनों देशों के रवैये से साफ है कि पश्चिम एशिया के तनाव में अभी जल्दी कोई कमी आने की उम्मीद नहीं है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ये तनाव जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमत में भी तेजी का रुख बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी भारत जैसे ऑयल इंपोर्टर देश की अर्थव्यवस्था पर निगेटिव इफेक्ट डाल सकती है।
टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव (Tarakeshwer Nath Vaishnav) का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत का लंबे समय तक बना रहना भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा सकता है। इसके साथ ही इसकी वजह से फिस्कल डेफिसिट टारगेट भी हिट हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकती है, महंगाई को बढ़ा सकती है और फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) को और बढ़ा सकती है। इसी तरह अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव से स्टॉक मार्केट में अनिश्चितता आ सकती है, क्योंकि सरकार को सब्सिडी, इंटरेस्ट रेट और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट पर पड़ने वाले असर के बारे में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।
