
मुंबई : (Mumbai) डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) (डीएफसी) के संचालन से भारत के माल ढुलाई परिवहन (India’s freight transport sector) में बड़ा बदलाव आया है। इन समर्पित रेल मार्गों का उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को तेज, अधिक क्षमता वाली और भरोसेमंद रेल माल ढुलाई सुविधा से जोड़ना है।
वर्तमान में देश में दो प्रमुख डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर संचालित हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर करीब 1,337 किलोमीटर लंबा है, जो पंजाब के न्यू साहनेवाल से हरियाणा और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार के न्यू सोननगर (New Sahnewal in Punjab through Haryana and Uttar Pradesh to New Sonnagar in Bihar) तक जाता है। वहीं वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर करीब 1,506 किलोमीटर लंबा है। यह उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से हरियाणा, राजस्थान और गुजरात होते हुए महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक फैला है।
तीसरे कॉरिडोर की भी घोषणा
केंद्रीय बजट में देश के लिए तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है। प्रस्तावित कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के दानकुनी से शुरू होकर झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र होते हुए गुजरात को जोड़ेगा। महाराष्ट्र में इसे समृद्धि महामार्ग के समानांतर जोड़ने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
2,843 किलोमीटर का मजबूत नेटवर्क
ईडीएफसी और डब्ल्यूडीएफसी (EDFC and WDFC) मिलकर करीब 2,843 किलोमीटर लंबा समर्पित रेल माल ढुलाई नेटवर्क तैयार करते हैं। इससे औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों को लॉजिस्टिक्स केंद्रों तथा बंदरगाहों से बेहतर संपर्क मिल रहा है। डीएफसी पर डबल स्टैक कंटेनर रेलगाड़ियों के संचालन से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ी है। मालगाड़ियों की गति और परिचालन दक्षता में सुधार के साथ मौजूदा रेल नेटवर्क पर माल यातायात का दबाव भी कम हुआ है।
यात्री ट्रेनों के लिए भी बढ़ी क्षमता
मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर उपलब्ध होने से पारंपरिक रेल मार्गों पर यातायात का दबाव कम हुआ है। इससे यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो रही है। डीएफसी नेटवर्क लॉजिस्टिक्स लागत और समय को कम करने के साथ आपूर्ति शृंखला तथा औद्योगिक विकास को गति देने वाली महत्वपूर्ण बुनियादी संरचना के रूप में उभर रहा है।
