
नई दिल्ली : (New Delhi) ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Automobile company Maruti Suzuki India Limited) (एमएसआईएल) ने गुजरात और हरियाणा (Gujarat and Haryana) के प्लांट में बनी रेलवे साइडिंग के जरिए 10 लाख गाड़ियों की डिलीवरी का आंकड़ा पार कर लिया है। दोनों विनिर्माण संयंत्रों के रेलवे टर्मिनल के जरिये 10 लाख वाहनों की ढुलाई की गई है। यह आंकड़ा इन संयंत्रों में विशेष परिवहन लाइन शुरू करने के तीन साल से कुछ अधिक समय में हासिल किया गया है।
मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India) ने शुक्रवार को कहा कि कुल डिस्पैच में गुजरात का हिस्सा 7.9 लाख है, जबकि मानेसर का योगदान 2.1 लाख है। मारुति सुजुकी ने कहा कि अगस्त तक वित्त वर्ष 2026-27 में मारुति के रेल-आधारित डिस्पैच में इन दोनों सेंटर्स की हिस्सेदारी 70 फीसदी रही। इसमें गुजरात के हंसलपुर संयंत्र स्थित रेलवे साइडिंग से परिचालन मार्च 2023 में जबकि मानेसर (हरियाणा) रेलवे साइडिंग से परिचालन की शुरुआत जून 2025 में हुआ था।
कंपनी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में रेल आधारित कुल वाहन ढुलाई में से 70 फीसदी इन दो संयंत्र स्थित रेलवे साइडिंग के माध्यम से की गई है। उसका मध्यम अवधि का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030-31 तक कुल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाकर 35 फीसदी करने का है। मारुति सुजुकी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में 31 अगस्त तक उसकी रेल आधारित वाहन ढुलाई तीन लाख इकाइयों के आंकड़े को पार कर चुकी है।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक हिसाशी ताकेउची (Hisashi Takeuchi, CEO and Managing Director of Maruti Suzuki India Limited) ने कहा कि हमारे संयंत्र स्थित रेलवे साइडिंग के जरिये कुल 10 लाख वाहनों की ढुलाई का आंकड़ा छूना हमारी हरित लॉजिस्टिक यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित ये साइडिंग दर्शाती हैं कि कैसे एकीकृत मल्टी-मॉडल बुनियादी ढांचा परिचालन दक्षता और पर्यावरणीय लाभ दोनों प्रदान कर सकता है।
मारुति सुजुकी अपने विनिर्माण संयंत्रों में रेलवे साइडिंग स्थापित करने वाली भारत की पहली और एकमात्र यात्री वाहन निर्माता कंपनी (Maruti Suzuki is India’s first and only passenger vehicle manufacturer to establish railway sidings at its manufacturing plants) है। कंपनी ने कहा कि संयंत्र स्थित इन सुविधाओं के जरिये वाहनों के परिवहन को सड़क से रेल पर स्थानांतरित करने से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकने, ईंधन की खपत घटाने और सड़कों पर भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिली है।
