
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया संकट का असर बीते महीने के थोक महंगाई सूचकांक (Wholesale Price Index) पर देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते मई में थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 9.68 प्रतिशत रही है, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत रही थी। मासिक आधार पर सीधे थोक महंगाई में 1.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। थोक महंगाई के आंकड़े बताते हैं कि मई में सबसे अधिक ईंधन एवं ऊर्जा (‘fuel and power’) श्रेणी में 30.33 प्रतिशत की महंगाई दर्ज की गई है, जिसका असर अन्य क्षेत्रों पर भी देखने को मिला है। जैसे विनिर्माण क्षेत्र की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत रही है और प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई दर 4.99 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे साफ है कि पेट्रोल,डीजल, सीएनजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक महंगाई को बढ़ाने में सबसे अधिक रहा है क्योंकि पेट्रोलियम उत्पाद की महंगाई 49.82 फीसदी रही है जबकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 61.51 फीसदी तक पहुंच गई। इन सब उत्पादों की कीमतों में तेजी का असर अन्य क्षेत्रों पर भी देखने को मिला है।
