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Mumbai : फिल्म निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग जिम्मेदारी पूर्वक किया जाए: जिष्णु देव वर्मा

Mumbai: Artificial intelligence should be used responsibly in filmmaking: Jishnu Dev Varma

मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा (Maharashtra Governor Jishnu Dev Varma) ने सोमवार को मुंबई में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) (AI) रचनात्मक क्षेत्र के लिए असीम संभावनाएं लेकर आई है, किंतु इसका उपयोग अत्यंत जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है, लेकिन इसके उपयोग के दौरान फिल्म निर्माताओं और सर्जकों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

राज्यपाल की उपस्थिति में आज लघु कथा, वृत्तचित्र (documentary) तथा एनीमेशन फिल्मों का 19वां द्विवार्षिक मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF-2026) का मुंबई में शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर समाराेह काे संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मिफ्फ वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों का एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय महोत्सव बनकर उभरा है। उन्होंने स्मरण कराया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष मुंबई में वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (World Audiovisual and Entertainment Summit) (WAVES) का उद्घाटन किया था। इस सम्मेलन ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने की देश की आकांक्षा को नई शक्ति प्रदान की है।

राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष महोत्सव में विश्व के 46 देशों से 1,459 फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। उन्होंने कहा कि महोत्सव में 42 से अधिक भारतीय भाषाओं तथा 30 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं की फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, जो विश्व की विविध संस्कृतियों और मानवीय अनुभवों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्हाेंने कहा कि ये फिल्में समाज की वास्तविकताओं को सामने लाती हैं, इतिहास को संरक्षित करती हैं, स्थापित धारणाओं को चुनौती देती हैं तथा सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित करती हैं। वृत्तचित्र समाज के विभिन्न वर्गों को अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करते हैं और भविष्य को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं।

भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी होने का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवा फिल्म निर्माताओं को अपने दैनिक जीवन, परंपराओं और संघर्षों पर आधारित कहानियां प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने महिला फिल्म निर्माताओं (women filmmakers) की अधिक भागीदारी पर भी बल दिया ताकि उनके विशिष्ट दृष्टिकोण और अनुभव भारतीय कहानी कहने की परंपरा को और समृद्ध बना सकें। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति ने फिल्म निर्माण को अधिक लोकतांत्रिक और सुलभ बनाया है तथा नई रचनात्मक संभावनाओं के द्वार खोले हैं। राज्यपाल ने मिफ्फ और राज्य के विश्वविद्यालयों के मीडिया एवं मनोरंजन विभागों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का सहयोग विद्यार्थियों को वैश्विक सिनेमाई प्रवृत्तियों से परिचित कराएगा और भविष्य की रचनात्मक प्रतिभाओं को विकसित करने में सहायक होगा।

इस अवसर पर राज्यपाल ने पोलैंड की फिल्म ‘सिल्वर’ को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र फिल्म के लिए गोल्डन कॉन्च पुरस्कार प्रदान किया। इसके अलावा ईरान की फिल्म ‘अंडर द स्नो’ को अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ लघु कथा फिल्म के लिए सिल्वर कॉन्च पुरस्कार तथा जर्मनी की फिल्म ‘मायाज़ सॉन्ग’ (Under the Snow) को सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म के लिए सिल्वर कॉन्च पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक आशुतोष गोवारीकर (film director Ashutosh Gowariker) ने अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ ध्वनि, सर्वश्रेष्ठ संपादन तथा सर्वश्रेष्ठ छायांकन के पुरस्कार प्रदान किए।

समारोह में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रभात कुमार, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम, मराठी भाषा विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी तथा राज्यपाल के सह सचिव एस. राममूर्ति उपस्थित थे।