
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय ने भाजपा नेता अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा (BJP leaders Anurag Thakur, Parvesh Verma, and Kapil Mishra) के खिलाफ हेट स्पीच को लेकर माकपा नेता वृंदा करात की एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस विक्रमनाथ (Justice Vikram Nath) की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
वृंदा करात ने 29 अप्रैल के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। 29 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय ने वृंदा करात की याचिका आंशिक रुप से स्वीकार करते हुए कहा था कि अनुराग ठाकुर के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए जरुरी अनुमति नहीं ली गई थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने वृंदा करात (Brinda Karat) की याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले के खिलाफ वृंदा करात ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता ने कानून के दूसरे उपलब्ध उपाय का उपयोग नहीं किया। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के गुण दोष के आधार पर फैसला नहीं किया है बल्कि क्षेत्राधिकार पर विचार किया है।
26 अगस्त 2020 को राऊज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने वृंदा करात की याचिका खारिज कर दी थी। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से जरुरी अनुमति नहीं ली गई है इसलिए एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। ट्रायल कोर्ट ने अनिल कुमार और अन्य बनाम एमके अयप्पा और अन्य के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का उदाहरण दिया था, जिसमें कहा गया था कि लोकसेवक के खिलाफ जांच का आदेश बिना पूर्व अनुमति के नहीं दिया जा सकता है।
