
फिल्म: आर्यभट्ट का जीरो
कलाकार: हिमांश कोहली, रवि किशन, सोनाली सेहगल, दर्शना बानिक, नीरज सूद, शिल्पा शिंदे, राजेश शर्मा, इश्लिन प्रसाद, नरेश वोहरा
निर्देशक: कमल चंद्रा
लेखक: तारिक मोहम्मद
अवधि: 1 घंटा 54 मिनट
रिलीज़: 7 अगस्त 2026
रेटिंग: ⭐⭐⭐½ (3.5/5)
आज के दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं, बेरोजगारी और लगातार बढ़ते सामाजिक दबाव के बीच युवाओं की मानसिक स्थिति एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। निर्देशक कमल चंद्रा (Director Kamal Chandra) की ‘आर्यभट्ट का जीरो’ (Aryabhatta Ka Zero) इसी संवेदनशील विषय को भावनात्मक और प्रेरक अंदाज में पेश करती है। यह सिर्फ एक युवक की सफलता-असफलता की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, पारिवारिक रिश्तों और खुद पर भरोसा बनाए रखने की सीख देने वाली फिल्म है। लंबे समय बाद हिमांश कोहली (Himansh Kohli) एक ऐसे किरदार में नजर आते हैं, जो उनकी अभिनय क्षमता को नए अंदाज में सामने लाता है।
कहानी
फिल्म की कहानी उत्तराखंड के रहने वाले ब्रह्मगुप्त श्रीवास्तव उर्फ बग्गू (Himansh Kohli) के इर्द-गिर्द घूमती है। साधारण परिवार से आने वाला बग्गू अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता है, लेकिन हर कदम पर उसे असफलताओं का सामना करना पड़ता है। उसकी प्रेमिका रिंकू (Sonali Sehgal) की शादी एक अफसर से हो जाती है, जिसके बाद वह यूपीएससी पास कर बड़ा अधिकारी बनने का सपना देखता है। हालांकि किस्मत, परिस्थितियां और उसकी अपनी गलतियां बार-बार उसके रास्ते में बाधा बनती हैं। समाज और रिश्तेदार उसे ताने मारते हुए ‘आर्यभट्ट का जीरो’ कहने लगते हैं। ऐसे में क्या बग्गू अपनी हार को जीत में बदल पाएगा? यही सवाल फिल्म को अंत तक रोचक बनाए रखता है।
निर्देशन
निर्देशक कमल चंद्रा (Director Kamal Chandra) ने कहानी को सादगी और ईमानदारी के साथ पेश किया है। फिल्म अनावश्यक ड्रामा से बचते हुए वास्तविक जीवन के करीब रहती है। लेखक तारिक मोहम्मद की पटकथा भावनात्मक है और कई संवाद सीधे दिल को छूते हैं। खास तौर पर पिता-पुत्र के रिश्ते को जिस संवेदनशीलता से दिखाया गया है, वह फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है।
अभिनय
हिमांश कोहली इस फिल्म की जान हैं। उन्होंने एक संघर्षरत युवा की बेबसी, गुस्सा, उम्मीद और टूटन को बेहद सहजता से पर्दे पर उतारा है। यह उनके करियर की सबसे परिपक्व प्रस्तुतियों में से एक कही जा सकती है। नीरज सूद ने पिता के किरदार में शानदार अभिनय किया है। उनके और हिमांश के भावनात्मक दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। रवि किशन अपने देसी अंदाज से फिल्म में हल्कापन और मनोरंजन जोड़ते हैं। सोनाली सेहगल, दर्शना बानिक, राजेश शर्मा और शिल्पा शिंदे भी अपने-अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं।
तकनीकी पक्ष
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भावनात्मक दृश्यों को मजबूती देता है। उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशनों को कैमरे में प्रभावशाली ढंग से कैद किया गया है। संपादन कसा हुआ है और फिल्म अपनी रफ्तार बनाए रखती है। संगीत कहानी के साथ सहज रूप से आगे बढ़ता है।
फाइनल वर्डिक्ट
‘आर्यभट्ट का जीरो’ एक प्रेरणादायक पारिवारिक फिल्म है, जो बताती है कि असफलता किसी इंसान की पहचान नहीं होती। यह युवाओं को हार न मानने और अपने सपनों के लिए लगातार संघर्ष करने का संदेश देती है। हिमांश कोहली का दमदार अभिनय, भावनात्मक कहानी और कमल चंद्रा का संतुलित निर्देशन फिल्म को प्रभावशाली बनाते हैं। अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं, जो मनोरंजन के साथ प्रेरणा भी दें, तो ‘आर्यभट्ट का जीरो’ आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।
