
फिल्म: आवारापन 2
कलाकार: इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आजमी, सुविंदर विक्की
निर्देशक: नितिन कक्कड़
निर्माता: विशेष भट्ट
शैली: एक्शन, क्राइम, रोमांटिक थ्रिलर
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)
मुंबई : (Mumbai) साल 2007 में आई ‘आवारापन’ (‘Awarapan’) अपनी भावुक कहानी, रूहानी संगीत और शिवम के दर्द से भरे किरदार के कारण दर्शकों के दिल में आज भी खास जगह रखती है। करीब दो दशक बाद ‘आवारापन 2’ उसी किरदार और उसकी दुनिया को एक नए मिशन, बड़े कैनवास और ज्यादा इंटेंस एक्शन के साथ आगे बढ़ाती है। फिल्म सिर्फ पुराने नॉस्टेल्जिया पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि शिवम की जिंदगी में एक नई भावनात्मक लड़ाई जोड़ती है। इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) की दमदार वापसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है।
कहानी
फिल्म की शुरुआत पहले भाग की दर्दभरी यादों से होती है और फिर कहानी शिवम पंडित (इमरान हाशमी) की वर्तमान जिंदगी में पहुंचती है। अब शिवम एक अनाथालय चलाता है और वहां रहने वाली मासूम बच्ची आलिया से उसका गहरा लगाव है। उसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है, जब गोद लेने के बहाने मानव तस्करी करने वाला एक गिरोह आलिया को अगवा कर लेता है। इसी बीच इंटरपोल शिवम से संपर्क करता है और उसे इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने का मिशन सौंपता है। शिवम की तलाश उसे बैंकॉक के अंडरवर्ल्ड तक ले जाती है, जहां उसकी भिड़ंत खतरनाक अपराधी पूरन गब्बी से होती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात गैंगस्टर की बेटी ज़ारा (दिशा पाटनी) से होती है। ज़ारा आगे चलकर शिवम की इस खतरनाक लड़ाई में उसका साथ देती है। कहानी आगे बढ़ते हुए एक्शन, बदले, रिश्तों और अधूरे प्यार को एक साथ जोड़ती है। हालांकि कुछ मोड़ पहले से अनुमान लगाए जा सकते हैं, लेकिन फिल्म की भावनात्मक पकड़ दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखती है।
अभिनय
‘आवारापन 2’ पूरी तरह इमरान हाशमी के कंधों पर टिकी हुई है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। शिवम के किरदार में उनकी खामोशी, आंखों का दर्द और चेहरे पर दिखाई देने वाला गुस्सा कई दृश्यों को बेहद प्रभावशाली बना देता है। एक्शन दृश्यों में उनका अंदाज दमदार है, वहीं भावनात्मक पलों में वह किरदार की टूटन को बहुत सहजता से सामने लाते हैं। यह उनकी मजबूत वापसी कही जा सकती है। दिशा पाटनी (Disha Patani) ग्लैमरस अंदाज के साथ एक्शन दृश्यों में भी प्रभाव छोड़ती हैं। शिवम के साथ उनकी केमिस्ट्री अच्छी लगती है, हालांकि कुछ भावनात्मक दृश्यों में उनके अभिनय में और गहराई की गुंजाइश नजर आती है। शबाना आजमी फिल्म का सरप्राइज पैकेज हैं। उनके किरदार में एक अलग तरह की गंभीरता और खौफ दिखाई देता है। उनकी आवाज और स्क्रीन प्रेजेंस कई दृश्यों को प्रभावशाली बनाती है। सुविंदर विक्की भी अपने किरदार को मजबूती देते हैं और कहानी में जरूरी वजन जोड़ते हैं।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक नितिन कक्कड़ (Director Nitin Kakkar) ने फिल्म में इमोशन और एक्शन के बीच अच्छा संतुलन बनाने की कोशिश की है। शिवम के निजी दर्द को उसके मिशन के साथ जोड़ना कहानी को सिर्फ एक सामान्य एक्शन फिल्म बनने से बचाता है। बैंकॉक की लोकेशंस और अंडरवर्ल्ड की दुनिया को डार्क और स्टाइलिश अंदाज में पेश किया गया है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के माहौल को मजबूत करती है और एक्शन दृश्यों को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली बनाने में मदद करती है। बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी के तनाव और भावनात्मक दृश्यों को मजबूती देता है। हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म की गति थोड़ी धीमी महसूस होती है और संपादन को थोड़ा और चुस्त किया जा सकता था।
संगीत
‘आवारापन’ की पहचान उसके संगीत से भी जुड़ी रही है और सीक्वल इस विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है। ‘वे जुनून’, ‘ये आवारापन’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता कंटीन्यूज’ जैसे गाने कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूत करते हैं। संगीत में सूफियाना रंग और दर्द की वही भावना महसूस होती है, जो फिल्म के माहौल के साथ अच्छी तरह मेल खाती है।
फाइनल वर्डिक्ट
‘आवारापन 2’ एक ऐसी एक्शन-इमोशनल थ्रिलर (emotional thriller) है, जो पुराने प्रशंसकों के लिए नॉस्टेल्जिया और नए दर्शकों के लिए एक अलग कहानी का अनुभव लेकर आती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इमरान हाशमी का इंटेंस अभिनय, प्रभावी संगीत और एक्शन के साथ जुड़ी भावनात्मक कहानी है। कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार और पटकथा थोड़ी कमजोर पड़ती है, लेकिन दमदार क्लाइमैक्स और कलाकारों का प्रदर्शन इन कमियों को काफी हद तक संभाल लेता है।
अगर आप इमरान हाशमी के प्रशंसक हैं या ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जिनमें प्यार, दर्द, बदला, एक्शन और रूहानी संगीत का मिश्रण हो, तो ‘आवारापन 2’ एक बार जरूर देखी जा सकती है। पुराने शिवम का दर्द यहां भी बरकरार है, बस इस बार उसकी लड़ाई कहीं ज्यादा बड़ी और खतरनाक है।
