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Mumbai : महंगी हुई चीनी, इथेनॉल जिम्मेदार!

Mumbai: Sugar prices rise, ethanol blamed!

चीनी के दाम में एक महीने में 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी
खुदरा बाजार में 55.70 रुपये किलो पहुंची चीनी
मुंबई : (Mumbai)
भारत में चीनी की कीमतों में पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल अगस्त महीने में ही चीनी की कीमत करीब 20 फीसदी बढ़ चुकी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त को खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमत 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि एक महीने पहले यह 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी। 20 अगस्त 2025 को चीनी की कीमत 46.30 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

कीमतों पर सरकार का स्पष्टीकरण
चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार (central government) ने इथेनॉल उत्पादन को इसके लिए जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि चीनी की कीमतों में वृद्धि के पीछे उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी मौसम में बढ़ी मांग और मौसम के कारण गन्ने की फसल को हुआ नुकसान प्रमुख कारण हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को कीमतों में मौजूदा उछाल का कारण नहीं माना जा सकता।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल के लिए चीनी के उपयोग की हिस्सेदारी वर्ष 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा देश में उत्पादित इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, विशेषकर मक्का से प्राप्त होता है। सरकार के अनुसार चालू चीनी सत्र में उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआत में यह आंकड़ा 343 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया गया था। उत्पादन में कमी के पीछे गन्ने की फसल पर मौसम के प्रतिकूल प्रभाव को भी प्रमुख कारण बताया गया है।

सरकार ने निर्यात पर लगाई रोक
जन्माष्टमी के साथ त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। इसके अलावा थोक व्यापारियों के पास चीनी के भंडारण की सीमा भी तय की गई है।

क्या देश में चीनी की कमी है?
सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है। 28 जुलाई को जारी एक विज्ञप्ति में केंद्र सरकार ने कहा था कि मिलों के गेट पर चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी मौजूदा मांग और आपूर्ति की स्थिति के अनुरूप नहीं है। सरकार के अनुसार, कुछ व्यापारियों, डीलरों और बिचौलियों द्वारा जमाखोरी, सट्टेबाजी तथा चीनी की वास्तविक आवाजाही के बिना कागजों पर किए जा रहे कारोबार से बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति पैदा की गई। सरकार ने उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया था कि घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है।

30 लख टन चीनी इथेनॉल के लिए इस्तेमाल
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के तहत गन्ने से बनने वाले इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 के चीनी वर्ष में करीब 30 लाख टन चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए किया गया, जो देश के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 10 फीसदी है।

सरकार की प्राथमिकता चीनी उत्पादन
चीनी उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (ethanol-blended petrol program) चीनी मिलों के लिए नकदी उपलब्ध कराने में मदद करता है। हालांकि, सरकार लगातार स्पष्ट करती रही है कि चीनी का उत्पादन पहली प्राथमिकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कीमतों के लिए केवल इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कम शुरुआती भंडार, अनुमान से कम उत्पादन, त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग और कीमतें बढ़ने की आशंका से होने वाली अतिरिक्त खरीदारी भी इसके प्रमुख कारण हैं।