
चेन्नई : (Chennai) मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने गुरुवार को तमिलनाडु के कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से तमिलगा वेत्रि कड़गम (टीवीके) उम्मीदवार वी.एस. बाबू (Tamizhaga Vetri Kazhagam (TVK) candidate V.S. Babu) की जीत को चुनौती देने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन (Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) President M.K. Stalin) की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
दरअसल, हाल ही में संपन्न 2026 विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट से चुनाव लड़ने वाले एम.के. स्टालिन को वी.एस. बाबू के हाथों 8,795 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। बाबू को विजेता घोषित किए जाने के बाद स्टालिन ने मतगणना में अनियमितता का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया था।
स्टालिन के आवेदन पर निर्वाचन क्षेत्र की 14 ईवीएम और वीवीपैट मशीनों (14 EVMs and VVPAT machines) की जांच की गई थी। याचिका में दावा किया गया कि जांच के दौरान कुछ मशीनें खराब हो गईं और छह मतदान केंद्रों पर वीवीपैट पर्चियों के मिलान में अनियमितताएं सामने आईं। इसके आधार पर सभी ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों की दोबारा जांच कराने तथा वी.एस. बाबू की जीत को अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन (Justice S.A. Dharmadhikari and Justice G. Arul Murugan) की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल उठाया कि स्टालिन ने मामले को चुनाव याचिका के रूप में क्यों दाखिल नहीं किया।
स्टालिन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Senior Advocate Kapil Sibal) ने दलील दी कि चुनाव समाप्त होने के 45 दिन बाद निर्वाचन आयोग ने ईवीएम की जांच की, जिससे चुनाव याचिका दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि केवल समय सीमा समाप्त हो जाने के आधार पर याचिकाकर्ता को राहत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। सिब्बल ने वीवीपैट सॉफ्टवेयर में हेरफेर की आशंका भी जताई।
वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डामा शेषाद्रि नायडू (Senior Advocate Dama Seshadri Naidu) ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी विधायक के निर्वाचन को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका ही उचित कानूनी माध्यम है। उन्होंने यह भी दलील दी कि यदि ऐसी याचिकाओं को स्वीकार किया गया तो इसी आधार पर बड़ी संख्या में मामले सामने आ सकते हैं। आयोग ने 100 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों की दोबारा गिनती की मांग का भी विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्टालिन की याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से वी.एस. बाबू की जीत को चुनौती देने वाली यह याचिका समाप्त हो गई।
