
नई दिल्ली/मुंबई : (New Delhi/Mumbai) सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हमले के मामले में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के पार्षद रमेश म्हात्रे (Kalyan-Dombivali Municipal Corporation councilor Ramesh Mhatre) की जमानत पर बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) द्वारा लगाए गए स्टे को सही ठहराया है। अदालत ने टिप्पणी की कि मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का सम्मान नहीं करने वालों को जमानत का हकदार नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने पहले दी थी जमानत
मामले में हाईकोर्ट ने पहले निचली अदालत से मिली जमानत को रद्द कर म्हात्रे को सरेंडर करने का निर्देश दिया था। बाद में 7 अगस्त को हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी, लेकिन कड़ी शर्तें लगाते हुए ट्रायल में तेजी लाने का निर्देश भी दिया था। मामले में तीन अन्य आरोपियों को भी जमानत मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट में जमानत को चुनौती
रमेश म्हात्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी (Senior advocate Mukul Rohatgi) ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दलील रखी। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने हाईकोर्ट द्वारा मामले में हस्तक्षेप और जमानत पर लगाए गए स्टे को उचित माना।
7 सितंबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की है। डॉक्टरों पर हमले के मामलों में अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद इस मामले पर मेडिकल समुदाय और स्थानीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
